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पश्चिम बंगाल में राज्यसभा चुनाव को लेकर टीएमसी ने बाबुल सुप्रियो, कोयल मल्लिक, राजीव कुमार और मेनका गुरुस्वामी को उम्मीदवार बनाया है। पांच सीटों में चार पर टीएमसी और एक पर भाजपा की जीत संभावित मानी जा रही है। भाजपा ने ‘गैर-बंगाली’ उम्मीदवारों को लेकर टीएमसी पर हमला बोला है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Img: Google)
Kolkata: पश्चिम बंगाल में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आने वाले चुनावों के लिए अपने चार उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। पार्टी की ओर से जारी लिस्ट में बाबुल सुप्रियो, बंगाली फिल्म एक्ट्रेस कोयल मल्लिक, पश्चिम बंगाल के पूर्व DGP राजीव कुमार और सीनियर वकील मेनका गुरुस्वामी के नाम शामिल हैं।
TMC ने अपने ऑफिशियल बयान में कहा कि ये उम्मीदवार पार्टी की विचारधारा, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के प्रति उसके कमिटमेंट को दिखाते हैं। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके चारों उम्मीदवारों को शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि वे संसद में बंगाल की आवाज को मजबूती से उठाएंगे।
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पश्चिम बंगाल की पांच सीटों समेत 10 राज्यों की कुल 37 राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को वोटिंग होनी है। विधानसभा में अपनी ताकत के आधार पर, TMC को चार और BJP को एक सीट मिलने की उम्मीद है। राज्य विधानसभा में TMC के 220 से ज्यादा MLA हैं, जिससे उसका चार सीटें जीतना लगभग तय है। इस बीच, लगभग 65 MLA वाली BJP एक सीट जीतने की स्थिति में दिख रही है।
We are pleased to announce the candidature of Babul Supriyo, Rajeev Kumar (Former DGP, West Bengal), Menaka Guruswamy and Koel Mallick for the upcoming Rajya Sabha elections.
We extend our heartfelt congratulations and best wishes to them. May they continue to uphold Trinamool’s…
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) February 27, 2026
TMC के ऐलान के तुरंत बाद, भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पश्चिम बंगाल यूनिट ने तीखी प्रतिक्रिया दी। BJP ने आरोप लगाया कि TMC के ऐलान किए गए चार कैंडिडेट में से आधे 'गैर-बंगाली' हैं। पार्टी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह बंगाली पहचान की बात तो करती हैं, लेकिन कैंडिडेट चुनने में इसे प्राथमिकता नहीं दी गई।
BJP नेताओं ने सवाल उठाया कि क्या राज्य में काबिल बंगाली कैंडिडेट की कमी थी या यह फैसला पॉलिटिकल हिसाब-किताब के आधार पर लिया गया था। हालांकि, TMC ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी काबिलियत और योगदान को प्राथमिकता देती है, न कि क्षेत्रीय पहचान को।