Mainpuri News: स्वामी प्रसाद मौर्य का बड़ा एलान: यूपी में बनेगा ‘तीसरा मोर्चा’, बीजेपी को सत्ता से करेंगे बाहर

मैनपुरी पहुंचे स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने 2027 के चुनाव के लिए 'तीसरे मोर्चे' का एलान करते हुए कहा कि वे खुद बीजेपी को सत्ता से बाहर करेंगे। जानें हिंदू धर्म और आरक्षण पर उनके विवादित बयान।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 16 April 2026, 1:44 AM IST
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Mainpuri: राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य गुरुवार को मैनपुरी पहुंचे। यहाँ उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश का नौजवान आज बेरोजगार है और जनता बदहाली का सामना कर रही है।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी भारत को विश्व गुरु बनाने का सपना दिखाते थे, लेकिन आज हकीकत यह है कि देश के 80 करोड़ लोगों की जिंदगी सिर्फ 5-10 किलो राशन पर आकर टिक गई है।"

2027 के लिए 'तीसरे मोर्चे' का एलान: "हार्ड और सॉफ्ट हिंदुत्व वालों को चटाएंगे धूल"

आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक बड़ी राजनीतिक रणनीति का खुलासा करते हुए उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार को सत्ता से हटाने के लिए 'तीसरा मोर्चा' बनाने का एलान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस नए मोर्चे में कौन-कौन शामिल होगा, इसका खुलासा वे सही समय आने पर करेंगे। मौर्य के अनुसार, इस मोर्चे का मुख्य लक्ष्य उन ताकतों के खिलाफ लड़ना है जो 'हार्ड हिंदुत्व' और 'सॉफ्ट हिंदुत्व' का खेल खेलकर जनता को गुमराह कर रही हैं। साथ ही, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को सीधी चुनौती देते हुए दावा किया कि वे खुद भाजपा को सत्ता से बाहर करेंगे, क्योंकि वे सरकार के कामकाज के तरीके और उनकी सभी आंतरिक कमियों को बहुत करीब से देख और समझ चुके हैं।

हिंदू धर्म और जातिवाद पर विवादित बयान: "जाति का नंगा नाच समाज के लिए कैंसर"

स्वामी प्रसाद मौर्य ने जातिवाद और हिंदू धर्म की मौजूदा परिभाषाओं पर कड़ा प्रहार करते हुए मोहन भागवत और शंकराचार्य के बयानों को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि शंकराचार्य स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे क्षत्रिय को हिंदू मानने से इनकार करते हैं, तो फिर वास्तविक हिंदू कौन है? इसके साथ ही उन्होंने भेदभाव का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि दलित और आदिवासी समाज को वास्तव में हिंदू माना जाता, तो पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को मंदिरों में प्रवेश से न रोका जाता।

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मौर्य ने आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में नियुक्तियां पूरी तरह जातिवाद के आधार पर की जा रही हैं, जिससे एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के अधिकारों का सरेआम हनन हो रहा है।

महिला आरक्षण और भेदभाव

उन्होंने महिला आरक्षण का स्वागत तो किया, लेकिन साथ ही मांग की कि इसमें भेदभाव नहीं होना चाहिए। एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग की महिलाओं को भी इसमें समान भागीदारी और आरक्षण मिलना चाहिए।

संविधान और लोकतंत्र पर खतरा

राहुल गांधी के बयानों का समर्थन करते हुए मौर्य ने कहा कि वर्तमान सरकार का रवैया लोकतंत्र और संविधान विरोधी है। उन्होंने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए और कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या से भारत की अंतरराष्ट्रीय साख गिर रही है।

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अंबेडकरवादी राजनीति और मजबूरी

मौर्य ने कहा कि आज मनुवादी व्यवस्था के लोगों को बाबा साहब की याद सिर्फ इसलिए आ रही है क्योंकि बहुजन समाज अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो गया है। चुनाव में हार के डर से अब विपक्षी दल भी मजबूरी में अंबेडकर जयंती मना रहे हैं।

Location :  Mainpuri

Published :  16 April 2026, 1:44 AM IST

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