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बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Lucknow: बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो Mayawati एक बार फिर संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही हैं। पार्टी के भीतर हालिया बैठकों और निर्देशों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि बसपा अपने पुराने कद्दावर नेताओं की ‘घर वापसी’ की बड़ी मुहिम शुरू करने जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इसे 2027 के चुनाव से पहले बसपा की वापसी की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, मायावती ने संगठन को दो प्रमुख निर्देश दिए हैं। पहला, जिन नेताओं की क्षेत्रीय पकड़ मजबूत है उन्हें दोबारा पार्टी से जोड़ा जाए। इस जिम्मेदारी को कोऑर्डिनेटरों को सौंपा गया है। दूसरा, घटते हुए वोटबैंक को संभालने के लिए पुराने और अनुभवी नेताओं की वापसी कराई जाए।
इसी रणनीति के तहत पश्चिमी यूपी, अवध और पूर्वांचल के कई पूर्व सांसद और विधायक बसपा नेतृत्व के संपर्क में बताए जा रहे हैं। इनमें वे नेता भी शामिल हैं जिन्हें आगामी चुनाव में टिकट कटने या उपेक्षा का डर है। संभावना जताई जा रही है कि अगले 2-3 महीनों में कुछ बड़े नाम बसपा में वापसी कर सकते हैं।
बसपा के संभावित गठबंधन को लेकर भी सियासी हलचल तेज है। 20 मई को कांग्रेस के दो प्रमुख दलित नेता- Tanuj Punia और Rajendra Pal Gautam लखनऊ में मायावती के आवास पहुंचे थे। हालांकि, मायावती ने उनसे मुलाकात नहीं की।
फिलहाल न तो बसपा और न ही कांग्रेस की ओर से किसी गठबंधन की आधिकारिक पुष्टि हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस से गठबंधन नहीं भी होता है तो बसपा छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतर सकती है।
बसपा की सक्रियता का असर अन्य दलों पर भी दिख रहा है। समाजवादी पार्टी (SP) और भाजपा दोनों इस रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं। Akhilesh Yadav की अगुवाई में समाजवादी पार्टी PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को मजबूत करने में जुटी है, लेकिन बसपा की वापसी से दलित और मुस्लिम वोटों में संभावित बंटवारा हो सकता है।
बसपा एक बार फिर 2007 के फॉर्मूले पर लौटती दिख रही है, जब दलित-ब्राह्मण-मुस्लिम और पिछड़े वर्गों के गठजोड़ से उसे पूर्ण बहुमत मिला था। इसी मॉडल को 2027 में दोहराने की तैयारी चल रही है।
पार्टी ने जिम्मेदारियां भी बांटी हैं-
इसके अलावा सभी कोऑर्डिनेटरों को 3 महीने में मुस्लिम भाईचारा समितियां बनाने का लक्ष्य दिया गया है।
जानकारों के मुताबिक, बसपा पुराने और अनुभवी नेताओं को दोबारा शामिल कर संगठन में जान फूंकना चाहती है। इनमें वे चेहरे भी शामिल हैं जिन्हें पहले पार्टी से निकाला गया था या जिन्होंने अलग राह चुन ली थी।
पूर्व विधायक Lalji Verma और Ram Achal Rajbhar 2022 से पहले बसपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में चले गए थे। वहीं Guddu Jamali और Imran Masood जैसे नेताओं का भी राजनीतिक सफर अलग-अलग दलों में रहा है।
इसके अलावा Ritesh Pandey जैसे नेताओं ने संगठन में संवाद की कमी को भी बसपा छोड़ने की वजह बताया था।
Location : Lucknow
Published : 1 June 2026, 9:52 AM IST