DN Exclusive: मायावती पुराने कद्दावर नेताओं की कराएंगी घर वापसी?

मायावती एक बार फिर बसपा को मजबूत करने के लिए पुराने कद्दावर नेताओं की घर वापसी की रणनीति पर काम कर रही हैं। संगठन विस्तार, गठबंधन की अटकलें और सोशल इंजीनियरिंग के सहारे 2027 का सियासी समीकरण बदलने की कोशिश तेज हो गई है, जिससे यूपी की राजनीति में हलचल बढ़ी है।

Updated : 1 June 2026, 9:52 AM IST
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Lucknow: बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो Mayawati एक बार फिर संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही हैं। पार्टी के भीतर हालिया बैठकों और निर्देशों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि बसपा अपने पुराने कद्दावर नेताओं की ‘घर वापसी’ की बड़ी मुहिम शुरू करने जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इसे 2027 के चुनाव से पहले बसपा की वापसी की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।

दो स्तरों पर संगठन मजबूत करने की रणनीति

सूत्रों के अनुसार, मायावती ने संगठन को दो प्रमुख निर्देश दिए हैं। पहला, जिन नेताओं की क्षेत्रीय पकड़ मजबूत है उन्हें दोबारा पार्टी से जोड़ा जाए। इस जिम्मेदारी को कोऑर्डिनेटरों को सौंपा गया है। दूसरा, घटते हुए वोटबैंक को संभालने के लिए पुराने और अनुभवी नेताओं की वापसी कराई जाए।

इसी रणनीति के तहत पश्चिमी यूपी, अवध और पूर्वांचल के कई पूर्व सांसद और विधायक बसपा नेतृत्व के संपर्क में बताए जा रहे हैं। इनमें वे नेता भी शामिल हैं जिन्हें आगामी चुनाव में टिकट कटने या उपेक्षा का डर है। संभावना जताई जा रही है कि अगले 2-3 महीनों में कुछ बड़े नाम बसपा में वापसी कर सकते हैं।

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कांग्रेस और छोटे दलों से गठबंधन की अटकलें

बसपा के संभावित गठबंधन को लेकर भी सियासी हलचल तेज है। 20 मई को कांग्रेस के दो प्रमुख दलित नेता- Tanuj Punia और Rajendra Pal Gautam लखनऊ में मायावती के आवास पहुंचे थे। हालांकि, मायावती ने उनसे मुलाकात नहीं की।

फिलहाल न तो बसपा और न ही कांग्रेस की ओर से किसी गठबंधन की आधिकारिक पुष्टि हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस से गठबंधन नहीं भी होता है तो बसपा छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतर सकती है।

विपक्षी दलों पर असर

बसपा की सक्रियता का असर अन्य दलों पर भी दिख रहा है। समाजवादी पार्टी (SP) और भाजपा दोनों इस रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं। Akhilesh Yadav की अगुवाई में समाजवादी पार्टी PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को मजबूत करने में जुटी है, लेकिन बसपा की वापसी से दलित और मुस्लिम वोटों में संभावित बंटवारा हो सकता है।

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2007 वाला सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला फिर से?

बसपा एक बार फिर 2007 के फॉर्मूले पर लौटती दिख रही है, जब दलित-ब्राह्मण-मुस्लिम और पिछड़े वर्गों के गठजोड़ से उसे पूर्ण बहुमत मिला था। इसी मॉडल को 2027 में दोहराने की तैयारी चल रही है।

पार्टी ने जिम्मेदारियां भी बांटी हैं-

  • Satish Chandra Mishra ब्राह्मण समाज को जोड़ने की जिम्मेदारी में
  • Umashankar Singh क्षत्रिय समाज में सक्रिय
  • Vishwanath Pal अति-पिछड़ा वर्ग को साधने में लगे हैं

इसके अलावा सभी कोऑर्डिनेटरों को 3 महीने में मुस्लिम भाईचारा समितियां बनाने का लक्ष्य दिया गया है।

पुराने नेताओं की वापसी और अंदरूनी समीकरण

जानकारों के मुताबिक, बसपा पुराने और अनुभवी नेताओं को दोबारा शामिल कर संगठन में जान फूंकना चाहती है। इनमें वे चेहरे भी शामिल हैं जिन्हें पहले पार्टी से निकाला गया था या जिन्होंने अलग राह चुन ली थी।

पूर्व विधायक Lalji Verma और Ram Achal Rajbhar 2022 से पहले बसपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में चले गए थे। वहीं Guddu Jamali और Imran Masood जैसे नेताओं का भी राजनीतिक सफर अलग-अलग दलों में रहा है।

इसके अलावा Ritesh Pandey जैसे नेताओं ने संगठन में संवाद की कमी को भी बसपा छोड़ने की वजह बताया था।

Location :  Lucknow

Published :  1 June 2026, 9:52 AM IST

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