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अमेरिका ने खत्म की तेल पर अस्थायी छूट (Img: Google)
New Delhi : अमेरिका ने रूस और ईरान से तेल खरीद पर दी जा रही अस्थायी प्रतिबंध छूट (sanctions waivers) को खत्म कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि समुद्र में पहले से भेजे जा रहे यानी ऑन-वॉटर तेल की खरीद की अनुमति अब आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। इस फैसले का असर रूस और ईरान से जुड़े वैश्विक तेल व्यापार पर साफ तौर पर देखने को मिलेगा।
दरअसल, मध्य पूर्व में जारी तनाव और होरमुज़ जलडमरूमध्य में संभावित बाधाओं के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पहले ही प्रभावित हो रही थी। ऐसे में अमेरिका ने अस्थायी छूट देकर बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ाने, कीमतों को नियंत्रण में रखने और घरेलू ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की थी।
अब जब यह छूट खत्म हो गई है तो वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव और बढ़ सकता है। तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका भी जताई जा रही है। साथ ही रूस और ईरान से तेल खरीदने में नई बाधाएं सामने आएंगी। हालांकि रूस के तेल पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं है, बल्कि यह कुछ विशेष कंपनियों तक सीमित है।
इस पूरे मामले में भारत की भूमिका बेहद अहम है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा तेल आयात करता है। हाल के समय में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। मार्च महीने में भारत ने करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल खरीदा, जो उसके कुल आयात का लगभग 44% था।
छूट के दौरान भारत को सस्ता और स्थिर तेल मिलने का फायदा हुआ। साथ ही प्रतिबंधित टैंकरों से भी सीधे आपूर्ति संभव हो सकी, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत बनी रही।
लेकिन अब छूट खत्म होने के बाद भारत को अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ेगा। उसे प्रतिबंधित कंपनियों से दूरी बनानी होगी और नए सप्लायर व ट्रेडर्स के जरिए तेल खरीदने के विकल्प तलाशने होंगे। हालांकि माना जा रहा है कि रूस भारत के लिए एक प्रमुख सप्लायर बना रहेगा, भले ही आयात में कुछ कमी देखने को मिले।
अमेरिका के इस फैसले ने वैश्विक तेल बाजार में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। मध्य पूर्व पहले से अस्थिर है और सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है। ऐसे में आने वाले समय में तेल की कीमतें ऊंची रह सकती हैं। भारत के लिए यह स्थिति चुनौती के साथ-साथ अपनी ऊर्जा रणनीति को संतुलित करने का एक मौका भी है।
Location : New Delhi
Published : 16 April 2026, 9:53 PM IST
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