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वेस्ट बंगाल SIR सुसाइड केस (Source: Google)
यह पूरा मामला SIR प्रोसेस के दौरान शुरू हुआ जब प्रारंभिक जांच में अनारुल शेख का नाम "अंडर एडजुडिकेशन" श्रेणी में डाल दिया गया था। अपनी नागरिकता और पहचान को साबित करने के लिए अनारुल ने प्रशासन द्वारा मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेज़ समय पर जमा किए थे और आधिकारिक रूप से अपना नाम वापस सूची में जोड़ने की अपील भी की थी। इसके लिए उसने कई बार रामपुरहाट सबडिवीजन ऑफिस के चक्कर भी लगाए और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उसे कोई स्पष्ट आश्वासन या समाधान नहीं मिल सका।
अनारुल के परिवार का आरोप है कि वह पिछले कुछ दिनों से पूरी तरह टूट चुका था और उसे डर था कि उसकी पहचान हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। परिजनों के अनुसार, सभी वैध दस्तावेज़ होने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई, जिससे वह बेहद हताश हो गया और इसी मानसिक दबाव में आकर उसने कथित तौर पर ज़हर खा लिया। आनन-फानन में उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे दूसरे अस्पताल के लिए रेफर कर दिया, लेकिन दुर्भाग्यवश रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इस घटना ने पूरे नलहाटी क्षेत्र में डर और दुख का माहौल पैदा कर दिया है।
स्थानीय पुलिस ने इस मामले में अप्राकृतिक मौत का केस दर्ज कर अपनी जांच तेज कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वे इस घटना के हर पहलू को बारीकी से खंगाल रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या आत्महत्या का एकमात्र कारण वोटर लिस्ट से नाम हटना ही था या इसके पीछे कोई और व्यक्तिगत वजह भी रही है। वहीं दूसरी ओर, इस घटना ने प्रशासनिक स्तर पर वोटर लिस्ट के सरलीकरण और पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि एक साधारण नागरिक के लिए अपनी पहचान की लड़ाई अंततः जानलेवा साबित हुई।
Location : Birbhum
Published : 7 April 2026, 11:23 AM IST