पंजाब में निकाय चुनाव पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बैलेट पेपर से ही डाले जाएंगे वोट; पढ़ें पूरी खबर

पंजाब स्थानीय निकाय चुनाव बैलेट पेपर से ही होंगे। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने ईवीएम से चुनाव कराने की जनहित याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है और अब ईवीएम से मतदान कराना व्यावहारिक नहीं है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 23 May 2026, 10:34 AM IST
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Chandigarh: पंजाब में होने वाले आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर चल रहा संशय अब पूरी तरह खत्म हो गया है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के इस्तेमाल को लेकर दायर की गई जनहित याचिकाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव पारंपरिक बैलेट पेपर (मतपत्र) के जरिए ही संपन्न कराए जाएंगे।

इससे पहले हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सार्वजनिक कर दिया गया। पंजाब में आठ नगर निगमों, 71 नगर काउंसिल और 21 नगर पंचायतों के लिए आगामी 26 मई को मतदान होना तय है, जिसके नतीजे 29 मई को घोषित किए जाएंगे।

याचिका खारिज होने की मुख्य वजह: बहुत देर से पहुंचे कोर्ट

पंजाब के एडिशनल एडवोकेट जनरल फेरी सोफत ने शुक्रवार (22 मई) को मीडिया से औपचारिक बातचीत के दौरान मामले की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कोर्ट में कुल तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें बैलेट पेपर के फैसले को चुनौती देते हुए ईवीएम से मतदान कराने का पुरजोर आग्रह किया गया था।

याचिकाओं को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने बेहद तार्किक टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि चुनाव की प्रशासनिक प्रक्रिया अब काफी आगे बढ़ चुकी है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत का दरवाजा खटखटाने में बहुत देर कर दी है, इसलिए ऐन वक्त पर चुनावी प्रक्रिया के नियमों में इस तरह का बड़ा बदलाव नहीं किया जा सकता।

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राज्य निर्वाचन आयोग ने कोर्ट के सामने रखीं व्यावहारिक दिक्कतें

सुनवाई के दौरान राज्य निर्वाचन आयोग के वकील ने अदालत के समक्ष ईवीएम से चुनाव कराने को लेकर कई व्यावहारिक और तकनीकी चुनौतियां पेश कीं। एडिशनल एडवोकेट जनरल सोफत के मुताबिक, निर्वाचन आयोग ने कोर्ट को स्पष्ट बताया कि ईवीएम के माध्यम से चुनाव कराने, मशीनों की तैयारी करने, सुरक्षा व्यवस्था और मॉक पोल संचालन समेत पूरी प्रक्रिया को री-शेड्यूल करने में कम से कम 15 दिन का अतिरिक्त समय लगता है। ऐसे में महज कुछ दिनों के भीतर पूरे तंत्र को बदलना असंभव है।

राजस्थान से समय पर नहीं पहुंच सकीं ईवीएम मशीनें

मामले में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब राज्य निर्वाचन आयोग के वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि राजस्थान से गुरुवार सुबह भेजी गई ईवीएम मशीनें किन्हीं कारणों से अभी तक चंडीगढ़ नहीं पहुंच सकी हैं। मशीनों की अनुपलब्धता और समय की कमी के कारण व्यावहारिक रूप से 26 मई को ईवीएम के जरिए पारदर्शी और सुरक्षित मतदान कराना नामुमकिन है।

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गौरतलब है कि इन चुनावों के लिए अधिसूचना 13 मई को ही जारी की गई थी और नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 19 मई थी। अब सभी दल और उम्मीदवार बैलेट पेपर के आधार पर ही 26 मई को होने वाली वोटिंग के लिए चुनावी मैदान में उतरेंगे।

Location :  Chandigarh

Published :  23 May 2026, 10:34 AM IST

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