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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 13 साल से अचेत अवस्था में पड़े गाजियाबाद के युवक हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया (इच्छामृत्यु) देने की अनुमति दे दी। यह देश का पहला मामला है जिसमें 2018 के कॉमन कॉज फैसले को कानूनी रूप से लागू करते हुए पैसिव यूथेनेशिया की मंजूरी दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 13 साल से अचेत अवस्था में पड़े गाजियाबाद के युवक हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया (इच्छामृत्यु) देने की अनुमति दे दी। यह देश का पहला मामला है जिसमें 2018 के कॉमन कॉज फैसले को कानूनी रूप से लागू करते हुए पैसिव यूथेनेशिया की मंजूरी दी गई है।
हरीश में 13 साल से कोई सुधार नहीं। उसकी स्थिति केवल दुख बढ़ाएगी। कोर्ट ने माना कि वह स्थायी वेजिटेटिव स्टेट में है, न जागरूकता, न सुधार की संभावना है। जस्टिस पारदीवाला ने कहा, 'यह हमारे लिए कठिन निर्णय है, पर हम उसे अनंत पीड़ा में नहीं रख सकते।'
SC ने कहा, यह पहला निष्क्रिय इच्छामृत्यु का मामला है जहां 2018 कॉमन कॉज़ दिशानिर्देशों को कानूनी रूप से लागू किया गया है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि SC दिशानिर्देशों के अनुरूप इच्छामृत्यु पर एक व्यापक कानून लाएं।
इच्छामृत्यु (Euthanasia) वह प्रक्रिया है जिसमें किसी ऐसे मरीज का जीवन समाप्त कर दिया जाता है जो लंबे समय से असहनीय दर्द या गंभीर बीमारी से गुजर रहा हो और जिसके ठीक होने की कोई उम्मीद न हो। आमतौर पर परिवार या मरीज की इच्छा पर डॉक्टर इलाज बंद कर देते हैं या ऐसी दवा दी जाती है जिससे मौत हो जाती है।
इच्छामृत्यु मृत्यु का अधिकार (Right to Die with Dignity) संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई थी।