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रेलवे के वकीलों की फीस में बंपर बढ़ोतरी (Img: Google)
New Delhi: रेलवे बोर्ड ने अपने पैनल में शामिल अधिवक्ताओं की फीस और विभिन्न भत्तों में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए 20 से 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। यह नई दरें 1 फरवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी। इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं, जिससे रेलवे से जुड़े कानूनी मामलों में कार्यरत वकीलों को सीधा लाभ मिलेगा।
संशोधित व्यवस्था के तहत सुप्रीम कोर्ट में ग्रुप ए के अधिवक्ताओं को नियमित अपीलों की अंतिम सुनवाई के लिए अब 16,000 रुपये के स्थान पर 21,600 रुपये प्रतिदिन फीस मिलेगी। वहीं हाईकोर्ट और केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में वरिष्ठ अधिवक्ताओं की प्रभावी सुनवाई फीस 9,000 रुपये से बढ़ाकर 14,400 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है।
यह बढ़ोतरी कानूनी सेवाओं की बदलती जरूरतों और महंगाई को देखते हुए की गई बताई जा रही है।
रेलवे के सामान्य पैनल अधिवक्ताओं की फीस में भी बढ़ोतरी की गई है। अब उन्हें 3,000 रुपये के बजाय 3,600 रुपये प्रतिदिन मिलेंगे। इसके अलावा जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यरत अधिवक्ताओं की मासिक रिटेनरशिप फीस 6,000 रुपये से बढ़ाकर 9,600 रुपये कर दी गई है।
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प्रभावी सुनवाई की फीस को 1,800 रुपये से बढ़ाकर 2,880 रुपये और ड्राफ्टिंग फीस को 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,400 रुपये कर दिया गया है।
मध्यस्थता (Arbitration) मामलों में वरिष्ठ अधिवक्ताओं को अब प्रति सुनवाई 3,600 रुपये की फीस दी जाएगी। इसके साथ ही यात्रा, होटल और क्लर्क व्यय की सीमा भी सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप संशोधित की गई है।
रेलवे बोर्ड के विधि सलाहकार एम.सी. प्रूस्ती द्वारा 1 जून को जारी आदेश के अनुसार, ये सभी संशोधित दरें 1 फरवरी 2026 से लागू होंगी। उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशिकांत त्रिपाठी के अनुसार, नए आदेश को अमल में लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
Location : New Delhi
Published : 10 June 2026, 2:49 PM IST
Topics : GovernmentPolicy highcourt law railways SupremeCourt