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वेश्यावृत्ति पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी फोटो सोर्स-डाइनामाइट न्यूज
New Delhi: देश की सर्वोच्च अदालत की एक अहम टिप्पणी ने एक बार फिर वेश्यावृत्ति, मानवाधिकार और कानून को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि वेश्यावृत्ति (Prostitution) को पूरी तरह खत्म करना कानून का उद्देश्य नहीं है, बल्कि कानून का फोकस इसके व्यवसायीकरण, शोषण और मानव तस्करी पर है।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत में सेक्स वर्क, मानवाधिकार और कानूनी सुरक्षा को लेकर लंबे समय से चर्चा जारी है।
भारत में क्या है कानून?
भारत में अक्सर यह माना जाता है कि वेश्यावृत्ति पूरी तरह गैरकानूनी है, लेकिन कानूनी स्थिति इससे थोड़ी अलग है। भारत में स्वेच्छा से किया गया सेक्स वर्क सीधे तौर पर अवैध नहीं है, लेकिन इससे जुड़े कई काम कानून के दायरे में आते हैं।
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मुख्य रूप से, 1956 ITPA लागू होता है, जिसके तहत देह व्यापार के लिए दलाली करना अपराध है वेश्यालय (Brothel) चलाना गैरकानूनी है सार्वजनिक जगहों पर ग्राहकों को आकर्षित करना अपराध माना जा सकता है मानव तस्करी, जबरन देह व्यापार और नाबालिगों के शोषण पर सख्त सजा का प्रावधान है, यानी कानून का निशाना केवल सेक्स वर्क नहीं, बल्कि उससे जुड़ा शोषण और संगठित कारोबार है।
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी क्यों अहम मानी जा रही है?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, अदालत की टिप्पणी इस बात की ओर इशारा करती है कि सेक्स वर्कर्स को अपराधी की तरह नहीं, बल्कि अधिकार रखने वाले नागरिक के रूप में भी देखा जाना चाहिए। सुप्रीम Court पहले भी कह चुका है कि सेक्स वर्कर्स को गरिमा और संविधान के तहत मिले मौलिक अधिकारों का संरक्षण प्राप्त है। पुलिस और प्रशासन को उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए। कई मानवाधिकार संगठनों का तर्क है कि सेक्स वर्क को पूरी तरह अपराध की नजर से देखने से शोषण, हिंसा और तस्करी जैसी समस्याएं खत्म नहीं होतीं, बल्कि कई बार और छिप जाती हैं।
Location : New Delhi
Published : 1 June 2026, 2:22 PM IST
Topics : illegal prostitution Supreme Court