फैसला अभी बाकी है, लेकिन बड़ा संदेश साफ है: भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत

भोजशाला विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया है जिसने दोनों पक्षों के लिए नए सवाल खड़े कर दिए हैं। मुस्लिम पक्ष को बड़ी राहत नहीं मिली, लेकिन अदालत ने एक अहम अंतरिम व्यवस्था भी बनाई है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 14 July 2026, 3:34 PM IST
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New Delhi: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने फिलहाल मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जिसमें भोजशाला परिसर को प्राचीन वागदेवी (मां सरस्वती) मंदिर माना गया था। हालांकि, कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अंतरिम व्यवस्था भी बनाई है, ताकि किसी भी पक्ष के अधिकारों पर अंतिम फैसला आने तक शांति और संतुलन बना रहे।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उसका यह आदेश केवल अंतरिम व्यवस्था है। इससे किसी भी पक्ष के दावे या अधिकार पर अंतिम मुहर नहीं लगती। अंतिम फैसला विस्तृत सुनवाई के बाद ही होगा।

जुमे की नमाज के लिए अलग जगह देने का निर्देश

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि भोजशाला परिसर से सटी खुली जगह पर शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच मुस्लिम पक्ष को नमाज अदा करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। कोर्ट ने प्रशासन से कहा कि इस व्यवस्था को शांतिपूर्ण तरीके से लागू किया जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आदेश नहीं दिया जाएगा जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़े या सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो।

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कोर्ट ने बरतने को कहा संयम

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भोजशाला विवाद बेहद संवेदनशील मामला है। ऐसे मामलों में अदालत, प्रशासन और सभी पक्षों को अपने शब्दों और कदमों में पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। पीठ ने कहा कि किसी भी टिप्पणी या आदेश का असर सामाजिक माहौल पर पड़ सकता है। इसलिए न्यायिक प्रक्रिया के दौरान संतुलित दृष्टिकोण अपनाना बेहद जरूरी है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा था?

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने अपने फैसले में भोजशाला परिसर को राजा भोज की संपत्ति और हिंदू मंदिर माना था। अदालत ने कहा था कि हिंदू समुदाय का पूजा का अधिकार कभी समाप्त नहीं हुआ।हाई कोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 की उस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए थे, जिसके तहत परिसर में नमाज की अनुमति दी गई थी। अदालत का मानना था कि यह व्यवस्था स्थल के मूल स्वरूप के अनुरूप नहीं थी।

इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार से मुस्लिम समुदाय के लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने पर विचार करने की भी बात कही थी, ताकि वहां मस्जिद बनाई जा सके।

पुरातात्विक सर्वेक्षण का भी उल्लेख

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में वर्ष 2024 में हुए पुरातात्विक सर्वेक्षण का भी जिक्र किया था। सर्वेक्षण में संस्कृत शिलालेख, हवन कुंड और मंदिर शैली से जुड़े कई अवशेष मिलने की बात सामने आई थी। इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने परिसर को प्राचीन वागदेवी मंदिर मानते हुए हिंदू पक्ष के पूजा अधिकार को स्वीकार किया था।

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एएसआई ने भी जारी किया था नया आदेश

हाई कोर्ट के फैसले के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने नया आदेश जारी कर हिंदू समुदाय को भोजशाला परिसर में पूजा और मां सरस्वती से जुड़े अध्ययन कार्यों के लिए बिना रोक-टोक प्रवेश की अनुमति दी थी। हालांकि, एएसआई ने यह भी स्पष्ट किया कि स्मारक होने के कारण पूरे परिसर का प्रशासनिक नियंत्रण उसके पास ही रहेगा और सभी गतिविधियां नियमों के तहत संचालित होंगी।

आगे क्या होगा?

अब सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई में सभी पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।

Location :  New Delhi

Published :  14 July 2026, 3:34 PM IST

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