सरकारी योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा! जिन लोगों ने आवेदन तक नहीं किया, उनके नाम पर निकल गई सब्सिडी

PM सूर्य घर योजना में सामने आया मामला सिर्फ एक फर्जी आवेदन का नहीं, बल्कि सरकारी सब्सिडी के बड़े खेल की ओर इशारा कर रहा है। जांच में ऐसे नाम मिले जिन्होंने कभी आवेदन नहीं किया, जबकि कुछ मृत लोगों को भी लाभार्थी बना दिया गया।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 15 July 2026, 6:10 PM IST
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Bareilly: बरेली प्रधानमंत्री की ड्रीम परियोजना पीएम सूर्य घर योजना में फर्जीवाड़े की ऐसी परतें खुली हैं, जिसने सरकारी तंत्र को भी चौंका दिया। जांच में सामने आया कि जिन लोगों ने कभी आवेदन तक नहीं किया, उनके नाम पर सब्सिडी निकाल ली गई, जबकि कुछ मामलों में मृतकों को भी लाभार्थी बना दिया गया। नौ आवेदनों की जांच में आठ फर्जी मिलने के बाद यूपीनेडा ने वेंडर के खिलाफ कैंट थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।

जांच में फर्जी निकले लाभार्थी

यूपीनेडा के वरिष्ठ लिपिक रघुवर दयाल ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि सचिव एवं मुख्य परियोजना अधिकारी के निर्देश पर सनराइज एंटरप्राइजेज की जांच कराई गई। जांच के दौरान फर्म के प्रोपराइटर सीबीगंज निवासी आशु गुप्ता की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू की गई। जांच में सामने आया कि फर्म द्वारा तैयार किए गए 29 रूफटॉप सोलर आवेदनों में से नौ की मौके पर जांच की गई।

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इनमें आठ लाभार्थी पूरी तरह फर्जी निकले, जबकि केवल एक स्थान पर ही सोलर सिस्टम स्थापित मिला। इससे योजना के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े की आशंका और गहरा गई है।

मृतकों के नाम पर निकाली गई सरकारी सब्सिडी

जांच में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में मृत व्यक्तियों को भी योजना का लाभार्थी दिखाया गया। वहीं कई ऐसे लोगों के नाम पर भी सब्सिडी निकाल ली गई, जिन्होंने कभी योजना के लिए आवेदन ही नहीं किया और उनके घरों पर कोई सोलर पैनल भी नहीं लगाया गया। आरोप है कि कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।

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यूपीनेडा की जांच के मुताबिक आरोपी वेंडर ने फर्जी मोबाइल नंबर, कूटरचित आवेदन पत्र, दस्तावेजों में हेरफेर और चेक में बदलाव कर सरकारी सब्सिडी की रकम विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कराई। जांच में वित्तीय लेन-देन का तरीका भी संदेहास्पद पाया गया है।

बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

मामले में केवल वेंडर ही नहीं, बल्कि कुछ बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता की भी आशंका जताई गई है। विभाग का मानना है कि बिना बैंक स्तर पर सहयोग के इस तरह की वित्तीय अनियमितता संभव नहीं है। इसलिए पुलिस अब बैंकिंग ट्रांजैक्शन और संबंधित खातों की भी जांच करेगी। यूपीनेडा की तहरीर के आधार पर कैंट थाना पुलिस ने आशु गुप्ता के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। 

Location :  Bareilly

Published :  15 July 2026, 6:10 PM IST

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