Moradabad: भूमाफियाओं से डील और हाईकोर्ट से केस वापस लेने के मामले में जानें EO पर क्या हुई कार्रवाई

संभल में 101 करोड़ रुपये की 38 बीघा सरकारी जमीन घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन ईओ राजकुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर भूमाफियाओं को फायदा पहुंचाने के लिए हाईकोर्ट से याचिका वापस लेने का आरोप है।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 2 July 2026, 7:53 PM IST
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Moradabad: संभल में करीब 101 करोड़ रुपये मूल्य की ग्राम सभा की जमीन से जुड़े चर्चित मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर पालिका के तत्कालीन अधिशासी अधिकारी (ईओ) एवं वर्तमान में शाहजहांपुर के सहायक नगर आयुक्त राजकुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। संभल कोतवाली पुलिस ने उन्हें सरकारी भूमि से जुड़े विवाद में आरोपी बनाए जाने के बाद हिरासत में लिया। इस मामले में कुल 32 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज है और अन्य आरोपियों की तलाश भी तेज कर दी गई है।

हाईकोर्ट से याचिका वापस लेने का आरोप

जांच में सामने आया कि राजकुमार गुप्ता पर साल 2013 में तत्कालीन ईओ रहते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित एक महत्वपूर्ण याचिका वापस लेने का आरोप है। प्रशासन का कहना है कि याचिका वापस लेने के बाद भूमाफियाओं को फायदा मिला और उन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा कर उसका अवैध तरीके से इस्तेमाल एवं बंदरबांट कर लिया।

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59 साल बाद ग्राम सभा को वापस मिली जमीन

यह मामला संभल के मुरादाबाद मार्ग स्थित तख्त गुसाईं क्षेत्र की 38 बीघा ग्राम सभा भूमि से जुड़ा है। उपसंचालक चकबंदी न्यायालय के आदेश के बाद यह जमीन दोबारा ग्राम सभा के नाम दर्ज की गई। जिला प्रशासन के अनुसार, इस भूमि की अनुमानित कीमत लगभग 101 करोड़ रुपये है। बताया गया कि करीब 59 वर्षों से यह जमीन निजी कब्जे में थी, जबकि इसका बड़ा हिस्सा खाली पड़ा हुआ था।

डीएम के निर्देश पर शुरू हुई कानूनी कार्रवाई

जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल को सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच कराई गई। इसके बाद उपसंचालक चकबंदी न्यायालय में पुनर्स्थापना अपील दाखिल की गई। लगातार सुनवाई के बाद 27 जून 2026 को न्यायालय ने संबंधित गाटा संख्या 206, 207, 233, 242/378 और 279 को ग्राम सभा के नाम दर्ज करने का आदेश दिया। प्रशासन ने कब्जा हटाने और सरकारी अभिलेखों में भूमि दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

कथित पट्टे पर उठे सवाल

जांच में यह भी सामने आया कि सईदुल रहमान ने वर्ष 1967 में तत्कालीन पालिका अध्यक्ष द्वारा पट्टा दिए जाने का दावा किया था। हालांकि प्रशासन का कहना है कि नगर पालिका अधिनियम, 1916 के तहत शासन की अनुमति के बिना ऐसी भूमि का हस्तांतरण संभव नहीं था। जांच में कथित पट्टा नियमों के विपरीत और विधि शून्य पाया गया।

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अन्य आरोपियों पर भी कसेगा शिकंजा

प्रशासन का कहना है कि यह मामला अभी जांच के दायरे में है। पुलिस अन्य नामजद आरोपियों की तलाश कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे प्रकरण ने सरकारी जमीनों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

Location :  Moradabad

Published :  2 July 2026, 7:42 PM IST

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