मोची के अकाउंट से 80 करोड़ का लेनदेन, शेयर ट्रेडिंग के नाम पर खेल

कानपुर के यशोदानगर में दवा कारोबारी अमित राठौर से शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 13 लाख रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि यह गिरोह दिल्ली, एनसीआर और पंजाब तक फैला हुआ है और एक बैंक खाते में तीन महीने में 80 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 19 April 2026, 2:28 PM IST
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Kanpur: शेयर ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का लालच कितना खतरनाक हो सकता है, इसका ताजा उदाहरण कानपुर में सामने आया है। यशोदानगर के दवा कारोबारी अमित राठौर से पहले 13 लाख रुपये की ठगी हुई और फिर जब पुलिस ने इसकी परतें खोलीं तो सामने आया एक ऐसा साइबर नेटवर्क, जो दिल्ली से लेकर पंजाब तक फैला हुआ है और करोड़ों रुपये के लेनदेन को अंजाम दे रहा था।

80 करोड़ के ट्रांजेक्शन से खुला बड़ा राज

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस भी हैरान रह गई। जिस बैंक खाते में दवा कारोबारी का पैसा गया था, वह कोई साधारण खाता नहीं था। यह खाता फाजिल्का के अबोहर निवासी मोची अजय कुमार के नाम पर था, जिसे एक फर्म के नाम पर करंट अकाउंट बनाकर इस्तेमाल किया जा रहा था। जांच में पता चला कि 30 सितंबर 2025 से 18 दिसंबर 2025 के बीच इस एक खाते में लगभग 80 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है।

कैसे हुई ठगी की शुरुआत

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब दवा कारोबारी अमित राठौर को नवंबर 2025 में टेलीग्राम पर एक लिंक मिला। इस लिंक में शेयर ट्रेडिंग में निवेश पर बड़े मुनाफे का दावा किया गया था। शुरुआती बातचीत के बाद उन्हें एक बैंक खाते में पैसा निवेश करने के लिए कहा गया। अमित राठौर ने नवंबर से दिसंबर के बीच करीब 13 लाख रुपये बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए। शुरुआत में उन्हें मुनाफे का भरोसा भी दिलाया गया, लेकिन अचानक ही पूरा सिस्टम गायब हो गया। न लिंक खुला, न किसी का फोन मिला और न ही कोई जवाब मिला।

एफआईआर के बाद शुरू हुई जांच

लूट का अहसास होने के बाद पीड़ित ने जनवरी 2026 में नौबस्ता थाने में एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने बैंक ट्रांजेक्शन की गहराई से जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि पीड़ित का पैसा कई बैंकों के जरिए घुमाया गया था। रकम सेंट्रल बैंक से एक्सिस बैंक, यूनियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक होते हुए दिल्ली के मयूर विहार स्थित नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव बैंक तक पहुंची।

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दो आरोपी गिरफ्तार

इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए नौबस्ता पुलिस ने पंजाब के फाजिल्का से करण कसेरा और गुलशन कुमार को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों ने “एके ट्रेडिंग” नाम से फर्जी फर्म बनाकर इस पूरे रैकेट को चलाने में मदद की थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि करण ऑटो पार्ट्स का काम करता था जबकि गुलशन इलेक्ट्रीशियन था। दोनों ही बैंक खातों को ऑपरेट करने, पैसा निकालने और आगे ट्रांसफर करने का काम करते थे। पुलिस ने इनके पास से दो आईफोन, चेकबुक, एटीएम कार्ड, कई चेक, डिपॉजिट स्लिप और 8500 रुपये नकद भी बरामद किए हैं।

कैसे काम करता था पूरा नेटवर्क

जांच में सामने आया कि यह कोई छोटा गिरोह नहीं था, बल्कि एक संगठित साइबर नेटवर्क था। यह गिरोह लोगों को शेयर ट्रेडिंग, गेमिंग एप, बेटिंग एप और डिजिटल अरेस्ट जैसे तरीकों से फंसाता था। दिल्ली में बैठा मास्टरमाइंड इस पूरे नेटवर्क को ऑपरेट कर रहा था, जबकि करण और गुलशन जैसे लोग बैंक खाते खुलवाने और पैसे निकालने का काम देखते थे। हर ट्रांजेक्शन के बाद वे अपना कमीशन रखते थे और बाकी रकम मास्टरमाइंड तक पहुंचा दी जाती थी।

अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी सामने आया

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल और डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी के मुताबिक इस गिरोह के तार सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं। जांच में एक व्हाट्सएप ग्रुप का भी खुलासा हुआ है जिसमें श्रीलंका, बांग्लादेश समेत कई देशों के लोग जुड़े हुए हैं। पुलिस को शक है कि यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी साइबर फ्रॉड को अंजाम दे रहा है और अलग-अलग देशों में पैसा भेजा जा रहा है। इस दिशा में अब गहन जांच चल रही है।

खाता फ्रीज, आगे की जांच जारी

पुलिस ने पीड़ित के 13.65 लाख रुपये फ्रीज करा दिए हैं। साथ ही देशभर में दर्ज 656 मामलों से जुड़े लिंक को भी खंगाला जा रहा है। कई राज्यों जैसे गाजियाबाद, नोएडा, सहारनपुर, बाराबंकी और आगरा की एफआईआर में भी इसी खाते का जिक्र मिला है।

Location :  Kanpur

Published :  19 April 2026, 2:28 PM IST

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