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सट्टेबाजी का हाईटेक गैंग बेनकाब (Img: DN)
Kanpur: कानपुर में सट्टा और ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में चल रहे एक बड़े साइबर रैकेट का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। यह कोई सामान्य गैंग नहीं था, बल्कि बेहद शातिर तरीके से काम करने वाला ऐसा नेटवर्क था, जिसमें ‘क्राइम किट’ अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार बन चुकी थी। पार्सल के जरिए पहुंचने वाली इस किट में सिम कार्ड, डेबिट कार्ड और चेकबुक शामिल होती थीं, जिनके जरिए करोड़ों का खेल खेला जा रहा था।
सोमवार को बर्रा इलाके से सट्टेबाजी के आरोप में गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे किए। इनके पास से भारी मात्रा में बैंकिंग से जुड़ी सामग्री बरामद हुई, जिसमें 54 डेबिट कार्ड, कई सिम कार्ड और चेकबुक शामिल हैं। यह सब सामान इन्हें पार्सल के जरिए ‘क्राइम किट’ के रूप में मिलता था।
जांच में सामने आया कि इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड दुबई में बैठा है। वहीं से वह नोएडा में मौजूद अपने हैंडलरों के जरिए पूरे उत्तर प्रदेश में नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था। कानपुर में इस गिरोह की ‘ब्रांच नंबर-24’ सक्रिय थी, जहां सैलरी पर रखे गए युवक इस अवैध काम को अंजाम दे रहे थे।
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गिरोह का संचालन बेहद गोपनीय तरीके से किया जाता था। किट कब और कहां पहुंचेगी, इसकी जानकारी सीधे सरगना के खास व्हाट्सएप नंबर पर भेजी जाती थी। इसके बाद यह किट किसी विश्वसनीय व्यक्ति के जरिए आरोपियों तक पहुंचाई जाती थी। फिर इन्हीं डेबिट कार्ड और सिम के जरिए तय खातों में पैसे ट्रांसफर किए जाते थे।
इस गिरोह का काम सिर्फ सट्टा चलाना नहीं था, बल्कि साइबर ठगी की रकम को खपाना भी था। सट्टे या ऑनलाइन गेमिंग में जीतने वाले लोगों को भुगतान करने के लिए इसी किट का इस्तेमाल होता था। ठगी से आए पैसे को अलग-अलग खातों में घुमाकर वैध दिखाने की कोशिश की जाती थी।
पुलिस को आरोपियों के पास से मिले 54 डेबिट कार्ड में कई राज्यों के कार्ड शामिल हैं। इनमें तेलंगाना, पंजाब, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश के कार्ड पाए गए हैं। इससे साफ है कि यह नेटवर्क सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि देशभर में फैला हुआ था।
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गिरफ्तार आरोपियों के पास से 26 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। हर मोबाइल में दो-दो सिम का इस्तेमाल किया जा रहा था, जो इसी क्राइम किट का हिस्सा थे। इन सिम के जरिए ऑनलाइन बैंकिंग कर अलग-अलग खातों से लेन-देन किया जाता था। पुलिस ने इन खातों में जमा 50 लाख रुपये से ज्यादा की रकम को फ्रीज कर दिया है।
गिरोह के सदस्य इतने शातिर थे कि वे एक जगह बैठकर ट्रांजैक्शन नहीं करते थे। सर्विलांस से बचने के लिए ये लोग ऑटो और कैब में घूमते रहते थे और रास्ते में ही पैसे ट्रांसफर करते थे। इससे उनकी लोकेशन ट्रैक करना पुलिस के लिए मुश्किल हो जाता था।
पुलिस ने इस मामले में जांच के लिए कई टीमें गठित की हैं। फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की कोशिश जारी है। अधिकारियों का कहना है कि इस रैकेट से जुड़े हर कड़ी को बेनकाब किया जाएगा, ताकि इस तरह के साइबर अपराधों पर लगाम लगाई जा सके।
Location : Kanpur
Published : 15 April 2026, 1:53 PM IST