कानपुर में साइबर ठगी के बड़े गिरोह का भंडाफोड़, इन लोगों को बनाते थे अपना टारगेट

कानपुर के रेउना क्षेत्र में पुलिस ने साइबर ठगी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया। गिरोह में पांचवीं से 11वीं पास युवक शामिल थे, जो फर्जी कॉलिंग के जरिए लोगों को ठगते थे। आरोपियों ने तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात में ट्रेनिंग लेने के बाद गांव में सेंटर खोलकर ठगी की साजिश रची।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 9 April 2026, 5:02 PM IST
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Kanpur: कानपुर के रेउना गांव में बैठे कुछ युवा साइबर अपराध की दुनिया में माहिर हो चुके थे। ये लोग सिर्फ शाब्दिक नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से भी इतने प्रवीण थे कि लोगों को कॉल सुनते ही यकीन हो जाता कि सामने कोई अधिकारी है। धमकी देने का उनका अंदाज किसी पुलिस वाले या सरकारी अधिकारी से कम नहीं था और इसी भरोसे में लोग आसानी से इनके जाल में फंस जाते थे।

गिरोह का ढांचा और तरीका

एडीसीपी एसओजी सुमित सुधाकर रामटेके ने बताया कि गिरोह पिछले एक साल से सक्रिय था। इसमें 10 सदस्य कॉलिंग के लिए जिम्मेदार थे। बाकी सदस्य क्षेत्र की निगरानी करते थे और अगर कोई सरकारी वाहन या पुलिस दिखाई देती थी तो तुरंत सूचना देते। आरोपियों ने म्यूल नंबर और म्यूल बैंक खाता रखा था, जिन पर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करवाया जाता था।

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ठगी के तरीके और रकम

गिरोह ने अलग-अलग तरीकों से लोगों को फंसाया। पेंशन स्कीम, बिजली बिल में छूट, कृषि बीमा जैसे बहाने बनाकर छोटे-छोटे रकम (11 हजार रुपये तक) मांगी जाती। कभी अश्लील वीडियो दिखाने या फर्जी जुर्माने का डर दिखाकर 11 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक वसूल किए जाते।

डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि आरोपी फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर कॉल करते थे। अगर कोई सवाल करता या संदेह जताता, तो दूसरा सदस्य पुलिस सायरन बजाकर गिरफ्तारी की धमकी देता। कभी कोई वरिष्ठ अधिकारी बनकर फोन पर डराता और कहता कि “वरना दिल्ली ले जाया जाएगा।”

ट्रेनिंग और अंतरराज्यीय नेटवर्क

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि रेउना गिरोह के कई युवक तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात में साइबर ठगी की ट्रेनिंग लेकर गांव लौटे। वहां से उन्होंने गांव में सेंटर खोलकर दूसरे लोगों को भी ठगी में शामिल किया। गिरोह में 50 साल तक के लोग भी शामिल थे। आरोपियों ने रोजगार का लालच देकर युवकों को कॉलिंग में लगाया। इन आरोपियों में से 12 के खिलाफ पहले ही अन्य शहरों में एफआईआर दर्ज थी।

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पुलिस के सामने लाइव प्रदर्शन

पुलिस ने आरोपियों को पकड़कर कमिश्नर कार्यालय में पेश किया। वहां दो आरोपियों ने आवास विकास अधिकारी बनकर कॉलिंग का लाइव प्रदर्शन किया। उनकी बातचीत और आत्मविश्वास देखकर पुलिस भी हैरान रह गई। पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने फर्जी कॉलिंग के दौरान लोगों को कैसे फंसाया और पैसा ट्रांसफर कराया, इसे दिखाया गया।

Location :  Kanpur

Published :  9 April 2026, 5:02 PM IST

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