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नैनीताल जिले के भीमताल में गीता बिष्ट झील पर नाव चलाने वाली पहली महिला बनीं। उनकी मेहनत और हौसला पर्यटकों के लिए प्रेरणा बन रहा है।
भीमताल की झील पर महिला की नई शुरुआत
Nainital: नैनीताल जिले के पहाड़ों में अब बदलाव सिर्फ महसूस नहीं हो रहा, बल्कि साफ नजर भी आने लगा है। जिस समाज में कभी महिलाओं के लिए काम की सीमाएं तय मानी जाती थीं, वहीं अब वही महिलाएं उन सीमाओं को तोड़कर नई मिसाल कायम कर रही हैं। भीमताल की शांत झील पर आज एक ऐसी ही तस्वीर उभर रही है, जहां पहली बार एक महिला नाव चलाकर न सिर्फ पर्यटकों को घुमा रही है, बल्कि समाज की सोच को भी नई दिशा दे रही है।
भीमताल झील पर पहली महिला नाविक
नैनीताल जिले के भीमताल की खूबसूरत झील पर इन दिनों एक अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही है। झील के बीच चप्पू थामे एक महिला आत्मविश्वास के साथ नाव चलाती नजर आती हैं। यह महिला हैं गीता बिष्ट, जो भीमताल झील पर अपने दम पर नाव चलाने वाली पहली महिला नाविक बन चुकी हैं। उनकी मौजूदगी झील की खूबसूरती में एक अलग ही कहानी जोड़ देती है।
पर्यटकों के बीच बनी खास पहचान
शांत पानी के बीच गीता की नाव जब आगे बढ़ती है, तो पर्यटक न सिर्फ झील का नजारा देखते हैं, बल्कि एक प्रेरणादायक सफर का हिस्सा भी बनते हैं। गीता से बातचीत करते हुए लोग उनके हौसले और मेहनत को महसूस कर पा रहे हैं। कई पर्यटक खास तौर पर उनकी नाव में बैठना पसंद कर रहे हैं, ताकि इस अनोखे अनुभव को करीब से जी सकें।
परिवार के लिए चुना कठिन रास्ता
अधेड़ उम्र की गीता बिष्ट ने अपने परिवार को सहारा देने के लिए यह काम चुना। वह रोज घर की जिम्मेदारियां निभाने के बाद झील पर पहुंचती हैं और अपने नंबर का इंतजार करती हैं। चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि सादगी भरी मुस्कान रहती है। यह मुस्कान बताती है कि मेहनत उनके लिए मजबूरी नहीं, बल्कि आत्मसम्मान का जरिया है।
नाविक नहीं, कहानी सुनाने वाली साथी
गीता की नाव में बैठने वाला हर यात्री उन्हें सिर्फ नाविक के तौर पर नहीं देखता। वह भीमताल की झील से जुड़े किस्से, पुराने दौर की यादें और यहां की खास बातें बड़े ही सहज अंदाज में सुनाती हैं। पानी में चप्पू की लय और गीता की बातें मिलकर सैर को यादगार बना देती हैं।
पर्यटकों की जुबानी तारीफ
झील की सैर के बाद पर्यटक विनोद सिरोही गीता की तारीफ करते नहीं थके। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की महिलाएं बेहद मजबूत होती हैं और मुश्किल हालात में भी सही रास्ता चुन लेती हैं। उनके मुताबिक गीता के साथ की गई यह सैर हमेशा उनके दिल में रहेगी।
सोच बदलती गीता की नाव
गीता बिष्ट ने साबित कर दिया है कि अगर मन में हिम्मत हो, तो कोई काम छोटा नहीं होता। भीमताल की झील पर उनकी नाव सिर्फ पानी नहीं काट रही, बल्कि उस सोच को भी बदल रही है जो महिलाओं को सीमाओं में बांध देती है।