नोएडा का कुख्यात और स्क्रैप माफिया रवि काना जेल से आया बाहर, अब कोर्ट ने जेल प्रशासन से मांगा इस बात का जवाब

ग्रेटर नोएडा के कुख्यात बदमाश रवि काना को वारंट के बावजूद जेल से रिहा किए जाने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बांदा जेल के जेलर से 6 फरवरी तक स्पष्टीकरण मांगा गया है।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 31 January 2026, 12:58 AM IST
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Greater Noida: ग्रेटर नोएडा से जुड़े एक सनसनीखेज मामले ने पुलिस, जेल प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था को आमने-सामने ला खड़ा किया है। जिस कुख्यात बदमाश को सलाखों के पीछे होना चाहिए था, वह जेल से बाहर निकल गया और किसी को भनक तक नहीं लगी। जब यह चूक अदालत के संज्ञान में आई तो न्यायालय ने इसे मामूली गलती नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था के साथ गंभीर खिलवाड़ माना। अब इस लापरवाही की कीमत जेल प्रशासन को चुकानी पड़ सकती है।

रवि काना की रिहाई पर बवाल

गौतमबुद्ध नगर से जुड़े इस मामले में कुख्यात बदमाश रवि काना को बांदा जेल से रिहा किया जाना भारी पड़ गया है। रवि काना के खिलाफ गौतमबुद्ध नगर की अदालत से पहले ही गिरफ्तारी वारंट जारी थे। इसके बावजूद जेल प्रशासन ने उसे रिहा कर दिया। जब यह तथ्य अदालत के सामने आया तो मामला गंभीर हो गया और कोर्ट ने तुरंत सख्त रुख अपनाया।

कोर्ट ने जेलर से मांगा जवाब

सीजीएम गौतमबुद्ध नगर ने इस प्रकरण को गंभीर लापरवाही मानते हुए बांदा जेल के जेलर से लिखित स्पष्टीकरण तलब किया है। कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं कि जेलर 6 फरवरी तक अपना जवाब दाखिल करें। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बावजूद रिहाई कैसे हुई, इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित जेल अधिकारी की बनती है।

तत्काल गिरफ्तारी के आदेश

अदालत ने कुख्यात बदमाश रवि काना की तत्काल गिरफ्तारी के आदेश भी दिए हैं। कोर्ट का मानना है कि इस तरह की लापरवाही से न सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। रवि काना और उसके गिरोह पर गौतमबुद्ध नगर समेत कई जिलों में दर्जनों आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और वह लंबे समय से पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ है।

बी-वारंट की प्रक्रिया भी नजरअंदाज

इस मामले में आरोपी रवि काना को बी-वारंट के जरिए कोर्ट में तलब किया गया था। विवेचक द्वारा न्यायिक हिरासत से पेशी सुनिश्चित करने और रिमांड स्वीकृत कराने के लिए विधिवत प्रार्थना पत्र भी न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। बी-वारंट दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 267 के तहत जारी किया जाता है, जो एक वैधानिक प्रक्रिया है। इसके बावजूद आरोपी की रिहाई ने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रशासन में मची हलचल

इस पूरे प्रकरण के बाद पुलिस और जेल प्रशासन में हलचल तेज हो गई है। अब सबकी नजरें जेलर के जवाब और कोर्ट की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। अदालत के सख्त रुख के बाद माना जा रहा है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है।

Location : 
  • Noida

Published : 
  • 31 January 2026, 12:58 AM IST

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