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हल्द्वानी में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले दस महीनों में बारह हजार से अधिक डॉग बाइट के मामले सामने आए हैं, जिससे शहर में दहशत का माहौल है और नगर निगम की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
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Nainital: हल्द्वानी की सुबह अब सिर्फ पहाड़ों की ठंडी हवा और बाजारों की चहल-पहल से नहीं होती, बल्कि गलियों में मंडराते खौफ से होती है। कभी स्कूल जाते बच्चे, तो कभी मॉर्निंग वॉक पर निकले बुजुर्ग, हर किसी के मन में एक ही डर है- कहीं अचानक कुत्तों का झुंड हमला न कर दे। शहर और आसपास के गांवों में कुत्तों के हमले अब आम नहीं, बल्कि रोज़मर्रा का क्राइम बनते जा रहे हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अस्पतालों की इमरजेंसी में हर दिन दर्जनों पीड़ित पहुंच रहे हैं।
कुत्तों के हमले बने शहर की सबसे बड़ी परेशानी
नैनीताल जिले के हल्द्वानी में आवारा और पालतू कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त गाइडलाइंस होने के बावजूद नगर निगम के पास आज तक ऐसा कोई स्थायी शेल्टर नहीं है, जहां खतरनाक कुत्तों को रखा जा सके। यही वजह है कि शहर की सड़कों पर डर खुलकर घूम रहा है और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आंकड़े जो डर बढ़ा रहे हैं
अप्रैल से जनवरी 2026 के बीच सिर्फ दस महीनों में कुत्तों के काटने के 12,176 मामले सामने आए हैं। इसी दौरान बिल्लियों के हमलों में 2,600 और बंदरों के हमलों में 602 लोग घायल हुए। सभी घायलों को बेस अस्पताल में इलाज मिला, जहां उन्हें एंटी-रेबीज वैक्सीन और सीरम दिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक इन मामलों में बच्चों की संख्या काफी ज्यादा है। हैरानी की बात यह है कि अब पालतू कुत्तों के हमले कुल मामलों के आधे से भी ज्यादा हो चुके हैं।
हर महीने बढ़ता खतरा
अगर महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो अप्रैल में 1104, मई में 1158, जून में 1144, जुलाई में 1591, अगस्त में 1234, सितंबर में 1171, अक्टूबर में 1142, नवंबर में 1177 और दिसंबर में 1216 लोग कुत्तों के हमले का शिकार बने। जनवरी 2026 में अब तक 1239 मामले दर्ज हो चुके हैं। बिल्लियों और बंदरों से जुड़े केस भी हर महीने सैकड़ों में सामने आ रहे हैं।
नगर निगम की तैयारी और हकीकत
नगर आयुक्त प्रतीक वर्मा का कहना है कि नगर निगम 250 कुत्तों की क्षमता वाला शेल्टर हाउस बनाने की प्रक्रिया में है। फिलहाल हमला करने वाले कुत्तों को पकड़कर निजी शेल्टरों में भेजा जा रहा है, लेकिन यह व्यवस्था शहर की जरूरतों के मुकाबले बेहद नाकाफी साबित हो रही है।
बेकाबू होती स्थिति
हल्द्वानी में बढ़ते कुत्तों के हमले साफ संकेत दे रहे हैं कि समस्या अब नियंत्रण से बाहर जाती दिख रही है। अगर जल्द कोई ठोस और प्रभावी योजना नहीं बनी तो आम लोगों की सुरक्षा पर संकट और गहरा सकता है।