मौत के बाद अपनों को याद आई संपत्ति! काशी के आश्रम में 55 बुजुर्गों की मौत, शव लेने पहुंचे परिजन

वाराणसी के अपना घर आश्रम में पिछले एक साल में 55 बुजुर्गों की मौत हुई। हैरानी की बात यह है कि कई बुजुर्गों को जीते-जी देखने उनके अपने नहीं पहुंचे, लेकिन मौत के बाद कुछ परिजन शव और जरूरी कागजात लेने आ गए।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 27 September 2026, 9:22 AM IST
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Varanasi: काशी के एक आश्रम से सामने आई कहानी रिश्तों और संपत्ति के बीच के उस दर्दनाक सच को दिखाती है, जिसे सुनकर शायद किसी को भी सोचने पर मजबूर होना पड़े। वाराणसी के अपना घर आश्रम में पिछले एक साल के दौरान 55 बुजुर्गों की मौत हुई। आश्रम संचालक के मुताबिक, इनमें कई ऐसे बुजुर्ग थे, जिन्हें उनके अपने जीते-जी देखने तक नहीं आते थे। लेकिन मौत के बाद कुछ परिजन अचानक आश्रम पहुंच गए।

मौत के बाद लेने पहुंचे शव

आश्रम के संचालक डॉ. के. निरंजन का कहना है कि कई मामलों में परिजन बुजुर्ग की मौत के बाद शव लेने पहुंचे। उनके मुताबिक, इसके पीछे कई बार संपत्ति के बंटवारे, जमीन की रजिस्ट्री या बीमा क्लेम से जुड़े कारण सामने आए। कुछ मामलों में परिजन अंतिम संस्कार के लिए भी नहीं पहुंचे। आश्रम की ओर से अंतिम संस्कार किए जाने के बाद वे केवल मृत्यु प्रमाणपत्र लेने आए। इसके जरिए उन्हें आगे की कानूनी और आर्थिक प्रक्रिया में मदद मिल सकती थी।

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आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों का सामान भी रिकॉर्ड में रखा जाता है। कपड़े, गहने, पैसे और दूसरी चीजों की पहचान के लिए सामान पर टैग लगाया जाता है और उसकी तस्वीरें भी सुरक्षित रखी जाती हैं। डॉ. निरंजन के मुताबिक, शव या मृत्यु प्रमाणपत्र लेने आने वाले कुछ परिजन सामान भी अपने साथ ले जाते हैं।

महिलाओं के मामले में और मुश्किल हालात

आश्रम में बुजुर्ग महिलाओं की स्थिति भी कई बार बेहद मुश्किल हो जाती है। किसी महिला की मौत के बाद यह सवाल खड़ा हो जाता है कि उसका अंतिम संस्कार कौन करेगा। कुछ मामलों में मायका, ससुराल और पति, तीनों ही जिम्मेदारी लेने से पीछे हट जाते हैं। डॉ. निरंजन ने एक 105 वर्षीय महिला का उदाहरण भी बताया। उनके अनुसार, महिला ने अपने सौतेले बेटे को गोद लेकर पाला था, लेकिन बाद में बेटे ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया। आश्रम में इस समय बड़ी संख्या में बुजुर्ग महिलाएं रह रही हैं।

दुबई में था बेटा, मौत के बाद आया

बेनियाबाग के रहने वाले करीब 65 वर्षीय एक बुजुर्ग को लावारिस हालत में सड़क से उठाकर आश्रम लाया गया था। वह करीब एक साल तक आश्रम में रहे। उनका बेटा दुबई में नौकरी करता था। बीमारी के दौरान रिश्तेदार को कई बार सूचना दी गई, लेकिन मदद के लिए कोई नहीं आया। बुजुर्ग की मौत के दो दिन बाद बेटा दुबई से आया और शव अपने साथ ले गया।

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लाखों की संपत्ति वाले बुजुर्ग भी रहे अकेले

करीब 70 वर्षीय एक सराफा कारोबारी ने परिवार से परेशान होकर जीवन के आखिरी दिन काशी में बिताए। आश्रम में रहने के दौरान उन्होंने बताया था कि उनकी तीन सराफा दुकानें और गांव में पांच बीघा जमीन है। बीमारी के दौरान कोई उन्हें देखने नहीं आया, लेकिन मौत के बाद परिजन शव लेने पहुंच गए।

Location :  Varanasi

Published :  27 September 2026, 9:22 AM IST

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