World Tourism Day: दिल्ली के स्मारकों में आज फ्री एंट्री, ऐतिहासिक गलियों और बाजारों की अनकही कहानियों को जानने का बेहतरीन मौका

विश्व पर्यटन दिवस पर आज दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों में मुफ्त प्रवेश के साथ स्वच्छता और धरोहर संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। हालांकि, बड़ी इमारतों से आगे बढ़कर दरिबा कलां, किनारी बाजार और खारी बावली जैसे सदियों पुराने बाजारों की अनकही सांस्कृतिक कहानियों को पर्यटकों तक पहुंचाने की जरूरत है।

Updated : 27 September 2026, 9:08 AM IST
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New Delhi: विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर आज दिल्ली के लाल किला, कुतुबमीनार और हुमायूं का मकबरा जैसे प्रमुख ऐतिहासिक स्मारकों में पर्यटकों के लिए प्रवेश पूरी तरह निशुल्क कर दिया गया है। राजधानी की सांस्कृतिक विरासत से लोगों को जोड़ने और स्वच्छता का संदेश देने के लिए प्रशासन की यह पहल सराहनीय है। लेकिन सवाल यह है कि क्या दिल्ली का पर्यटन केवल इन बड़ी इमारतों के चार दीवारों तक ही सिमट कर रह जाना चाहिए?

महलों से आगे: गलियों में दबी असली दिल्ली की दास्तान

आज जब पर्यटक इन भव्य स्मारकों का दीदार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शहर की वे ऐतिहासिक गलियां और पारंपरिक बाजार अपनी अनकही कहानियों के साथ खामोश खड़े हैं, जहां दिल्ली की असली रूह बसती है। लाल किला और कुतुबमीनार देखने वाले ज्यादातर विदेशी और देशी पर्यटक उन इलाकों से अनजान लौट जाते हैं, जहां सदियों पुरानी कला, खानदानी कारीगरी और व्यापारिक इतिहास आज भी सांस ले रहा है।

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पहचान का संकट: खरीदारी की जगह, पर इतिहास से अनजान बाजार

दिल्ली के कई बाजार अपनी विशिष्ट पहचान के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं, लेकिन व्यवस्थित और संगठित जानकारी के अभाव में पर्यटक इन्हें महज शॉपिंग हब मानकर लौट जाते हैं-

दरिबा कलां: चांदी के अनूठे आभूषणों और पीढ़ियों पुरानी इत्र की दुकानों का यह गढ़ 80 साल से अधिक का इतिहास समेटे हुए है।

किनारी बाजार: यहां आज भी कपड़ों पर पारंपरिक जरी-गोटा और हाथ की नक्काशी का काम जीवित है।

खारी बावली: मसालों के कारोबार का यह प्राचीन केंद्र सदियों पुरानी व्यापारिक संस्कृति की गवाही देता है।

नाई सड़क और दरियागंज: किताबों का यह पुराना बाजार राजधानी की गहरी बौद्धिक और साहित्यिक विरासत को दर्शाता है।

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हेरिटेज वॉक और सही मार्गदर्शन की दरकार

हेरिटेज वॉक के जानकारों का मानना है कि आज के सैलानियों में स्थानीय संस्कृति, खान-पान और पारंपरिक हुनर को गहराई से जानने की रुचि तेजी से बढ़ रही है। जरूरत इस बात की है कि स्मारकों के मुफ्त प्रवेश जैसी योजनाओं के साथ-साथ इन ऐतिहासिक बाजारों को भी पर्यटन के मुख्य मानचित्र पर लाया जाए। यदि इन जगहों पर पर्यटकों के लिए व्यवस्थित गाइडेड टूर या हेरिटेज ट्रेल की व्यवस्था हो जाए, तो सैलानी सिर्फ इमारतें देखकर नहीं, बल्कि दिल्ली की जीवंत परंपराओं और पीढ़ियों से संजोए गए हुनर को अपने दिल में बसाकर लौटेंगे।

Location :  New Delhi

Published :  27 September 2026, 9:07 AM IST

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