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उत्तर प्रदेश में ओवरलोडिंग की शिकायतों के बाद प्रदेश की सरकार एक्शन मोड में है और तीन एआरटीओ के निलंबन के बाद अब 18 का ट्रांसफर किया गया है। इनके साथ ही तीन आरटीओ का भी तबादला किया गया है।
प्रतीकात्मक छवि
New Delhi: उत्तर प्रदेश में ओवरलोडिंग की शिकायतों के बाद प्रदेश की सरकार एक्शन मोड में है और तीन एआरटीओ के निलंबन के बाद अब 18 का ट्रांसफर किया गया है। इनके साथ ही तीन आरटीओ का भी तबादला किया गया है। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने ओवरलोडिंग की शिकायतों पर ट्रांसफर कर सभी को तत्काल अपना कार्यभार संभालने के आदेश दिया है। नई तैनाती के बाबत शनिवार को विशेष सचिव खेमपाल सिंह ने आदेश जारी किया।
उत्तर प्रदेश में ओवरलोडिंग के मामलों को लेकर परिवहन विभाग में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। ट्रांसपोर्ट कमिश्नर के निर्देश पर जिलों और संभागों में तैनात 18 सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों (एआरटीओ) का तबादला किया गया है। इसके साथ ही तीन आरटीओ को नई तैनाती दी गई है। आलोक कुमार यादव को लखनऊ के सहायक संभागीय अधिकारी (एआरटीओ, प्रवर्तन) पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
आलोक कुमार यादव के अतिरिक्त चंपा लाल को सिद्धार्थनगर के एआरटीओ प्रशासन, अशोक कुमार श्रीवास्तव को गाजियाबाद, कौशल कुमार सिंह को सोनभद्र, मानवेंद्र प्रताप सिंह को सहारनपुर, विनय कुमार सिंह को आगरा और कृष्ण कुमार यादव को फर्रुखाबाद के एआरटीओ प्रशासन के पद पर भेजा गया है। हरिओम को बदायूं, वैभव सोती को बरेली, सतेंद्र कुमार यादव को मथुरा, विंध्याचल कुमार गुप्ता को कानपुर, उमेश चंद्र कटियार को रायबरेली, गुलाब चंद्र को अयोध्या, विपिन कुमार को बागपत, हरिओम को शाहजहांपुर, प्रतीक मिश्र को फतेहपुर, नीतू शमां को बुलंदशहर का एआरटीओ प्रवर्तन बनाया गया है। देवदत्त कुमार को मेरठ का एआरटीओ प्राविधिक बनाया गया है।
तीन आरटीओ को भी नई तैनाती दी गई है। विशेष सचिव खेमपाल सिंह ने बताया कि संभागीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ प्रशासन) राघवेंद्र सिंह को वाराणसी, मनोज कुमार सिंह को आरटीओ प्रशासन सहारनपुर व अम्बरीश कुमार को आरटीओ प्रवर्तन मेरठ बनाया गया है।
एसटीएफ ने गत नवंबर में लखनऊ, फतेहपुर, रायबरेली आदि में ओवरलोडिंग वाहनों से वसूली के मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें लखनऊ एआरटीओ सहित तीन एआरटीओ, पीटीओ आदि का निलंबन भी हुआ। एसटीएफ की कार्रवाई के बीच वाहनों की जांच का काम बाधित हो रहा था। ऐसे में नए एआरटीओ, प्रवर्तन को तैनाती मिलने से लखनऊ में वाहनों की जांच का काम फिर से पटरी पर लौट सकेगा।