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इलाहाबाद हाईकोर्ट
Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सम्मानजनक अंतिम संस्कार को व्यक्ति का मौलिक अधिकार बताते हुए लखनऊ के पिपरा घाट श्मशान की बदहाल स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। न्यायालय ने कहा कि किसी व्यक्ति की गरिमा केवल उसके जीवनकाल तक सीमित नहीं होती, बल्कि मृत्यु के बाद भी उसे सम्मानजनक अंतिम संस्कार मिलना चाहिए।
एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने लखनऊ जिला प्रशासन को पिपरा घाट श्मशान की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने विशेष रूप से श्मशान की जर्जर बाउंड्री वॉल और अन्य क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत कराने का आदेश दिया है।
खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि प्रत्येक नागरिक को सम्मानजनक अंतिम संस्कार उपलब्ध कराना राज्य की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। अंतिम संस्कार स्थलों की उचित देखभाल और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन का दायित्व है।
कोर्ट ने कैंट क्षेत्र स्थित पिपरा घाट श्मशान भूमि की खराब स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की अव्यवस्था मृतकों और उनके परिजनों की गरिमा के विपरीत है। न्यायालय ने प्रशासन से शीघ्र आवश्यक कदम उठाने और श्मशान की आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने को कहा है।
हाईकोर्ट ने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए श्मशान भूमि की स्थिति में जल्द सुधार करेगा, ताकि अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण मिल सके।
Location : Lucknow
Published : 5 June 2026, 6:34 PM IST
Topics : Allahabad High Court Lucknow bench Pipra Ghat Crematorium Public Interest Litigation Right to Dignified Funeral