यूपी-छत्तीसगढ़ में गर्मी का कहर, बांदा में 48.2°C तापमान ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

उत्तर प्रदेश का बांदा 48.2°C तापमान के साथ भीषण गर्मी की चपेट में है। पिघलती सड़कें, सूखती नदियां और घटती हरियाली ने इलाके को ‘मानव निर्मित हीट आइलैंड’ में बदल दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार बढ़ती गर्मी अब बड़ा पर्यावरणीय संकट बनती जा रही है।

Updated : 20 May 2026, 8:48 AM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश का बांदा जिला भीषण गर्मी की चपेट में है। मंगलवार को यहां तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे पूरा शहर भट्टी की तरह तपने लगा। सड़कों पर डामर पिघल गया, लोहे और धातु की चीज़ें छूना मुश्किल हो गया और दोपहर की हवाएं गर्म भाप जैसी महसूस होने लगीं। बुंदेलखंड का यह इलाका पिछले एक महीने में चार बार एशिया का सबसे गर्म क्षेत्र बन चुका है, जबकि दो बार यह दुनिया के सबसे गर्म स्थानों में शीर्ष पर रहा।

18 मई को बांदा में 47.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था, जो उस दिन दुनिया का सबसे अधिक तापमान था। इससे पहले 27 अप्रैल को भी यहां यही तापमान रिकॉर्ड किया गया था। 17 अप्रैल, 27 अप्रैल, 17 मई और 18 मई को बांदा एशिया के सबसे गर्म इलाकों में शामिल रहा।

बार-बार बढ़ रही है भीषण गर्मी

बांदा का अब तक का सबसे अधिक तापमान 10 जून 2019 को 49.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि अब चिंता की बात यह है कि 47 से 48 डिग्री तापमान लगातार और बार-बार दर्ज हो रहा है। पहले जो तापमान असामान्य माना जाता था, वह अब आम होता जा रहा है।

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भीषण गर्मी के कारण लोगों को डिहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन और हीटस्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ गया है। लंबे समय तक धूप में रहने पर कुछ ही मिनटों में हालत बिगड़ सकती है। तेज गर्मी से गाड़ियों के टायर फटने, टीन की छतों के तपने और सड़कों के पिघलने जैसी घटनाएं भी सामने आ रही हैं।

मौसम और भौगोलिक स्थिति बनी वजह

मौसम विभाग के अनुसार, थार रेगिस्तान से आने वाली गर्म और सूखी पश्चिमी हवाएं, आसमान में बादलों की कमी और लगातार तेज धूप इस भीषण गर्मी की प्रमुख वजह हैं। इसके साथ ही बुंदेलखंड की पथरीली जमीन तेजी से गर्मी सोख लेती है और देर तक उसे छोड़ती रहती है, जिससे रात में भी तापमान ज्यादा बना रहता है।

इस महीने की शुरुआत में पश्चिमी विक्षोभ का असर दक्षिणी उत्तर प्रदेश तक नहीं पहुंच पाया, जिसके कारण इलाके को गर्मी से राहत नहीं मिली। कठोर और चट्टानी भूमि के कारण बांदा अत्यधिक तापमान के प्रति अधिक संवेदनशील होता जा रहा है।

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हरियाली की कमी ने बढ़ाई परेशानी

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मौसम ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय बदलाव भी इस संकट के लिए जिम्मेदार हैं। बांदा में लगभग 105 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सिर्फ 3 प्रतिशत हरित आवरण बचा है, जो बुंदेलखंड में सबसे कम माना जा रहा है। इसके मुकाबले चित्रकूट में 18 प्रतिशत, ललितपुर में 11.5 प्रतिशत और झांसी में 6 प्रतिशत वन क्षेत्र मौजूद है।

सूखती नदियां, गिरता भूजल स्तर, लगातार हो रहा रेत खनन और तेजी से बढ़ते कंक्रीट के ढांचे प्राकृतिक ठंडक को खत्म कर रहे हैं। नमी और हरियाली कम होने से जमीन अधिक गर्म हो रही है और यही गर्मी धीरे-धीरे पूरे इलाके को “हीट आइलैंड” में बदल रही है।

दुष्चक्र में फंसता जा रहा बुंदेलखंड

विशेषज्ञों के अनुसार, कम होती वनस्पति और घटती नमी ने एक खतरनाक दुष्चक्र पैदा कर दिया है। हरियाली कम होने से मिट्टी की नमी घटती है, नमी कम होने से जमीन और अधिक गर्म होती है, और बढ़ती गर्मी बची हुई वनस्पति को भी खत्म कर देती है। यही वजह है कि बांदा और आसपास के इलाके लगातार भीषण गर्मी की मार झेल रहे हैं।

Location :  Lucknow

Published :  20 May 2026, 8:48 AM IST

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