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इलाहाबाद हाईकोर्ट (सोर्स- Pinterest)
प्रयागराज/लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने कार्यकाल खत्म होने के बाद ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी देने के सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है। अदालत ने इस मामले में सरकार के फैसले को असंवैधानिक करार दिया है।
यह फैसला अरविंद राठौर की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान आया है। याचिका में सरकार के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में बनाए रखने का फैसला लिया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि चुने हुए प्रतिनिधियों का कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्हें उसी पद पर प्रशासक के तौर पर जिम्मेदारी देना संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है।
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मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सरकार के आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका और कार्यकाल संविधान व कानून के तहत तय होते हैं। अदालत ने माना कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद उसी व्यक्ति को प्रशासक की जिम्मेदारी देना उचित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद अब प्रदेश की ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नई चुनौती खड़ी हो गई है। सरकार के सामने अब पंचायतों के कामकाज को सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तय करने का सवाल है। ग्राम पंचायतों में विकास कार्य, सरकारी योजनाओं और स्थानीय स्तर के प्रशासनिक फैसलों पर इसका असर पड़ सकता है।
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फिलहाल हाई कोर्ट ने सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगाई है। इस मामले में अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी। अब सबकी नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां कोर्ट इस मामले में आगे का रुख तय कर सकता है।
Location : Lucknow
Published : 26 June 2026, 1:57 PM IST