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सोनभद्र की अदालत ने 6 साल पुराने नाबालिग दुष्कर्म मामले में दोषी द्वारिका धरिकार को 20 साल कठोर कैद और 40 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया। 30 हजार रुपये पीड़िता को मिलेंगे। पुलिस ने अपहरण की एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।
प्रतीकात्मक छवि (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
Sonbhadra: म्योरपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में करीब साढ़े छह वर्ष पूर्व 14 वर्षीय नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट, अमित वीर सिंह की अदालत ने दोषी द्वारिका धरिकार को दोषसिद्ध पाकर 20 वर्ष की कठोर कैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी पर 40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यदि अर्थदंड का भुगतान नहीं किया गया तो आरोपी को एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। इस राशि में से 30 हजार रुपये पीड़िता को दिए जाएंगे।
मामला 16 जुलाई 2019 का है, जब द्वारिका धरिकार पुत्र राम धरिकार, निवासी खैराही, म्योरपुर थाना क्षेत्र ने रात 8 बजे 14 वर्षीय नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर कहीं और ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। पीड़िता के पिता ने 26 जुलाई 2019 को म्योरपुर थाने में तहरीर देकर घटना की जानकारी दी। इस पर म्योरपुर पुलिस ने अपहरण की एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।
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जांच के दौरान पुलिस ने दुष्कर्म की धारा भी बढ़ा दी और पर्याप्त सबूत मिलने के बाद विवेचक ने द्वारिका धरिकार के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों के वकीलों के तर्कों को सुना, 8 गवाहों के बयानों और पत्रावली का अवलोकन किया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि प्रस्तुत सबूतों, गवाहों के बयानों और जांच के दौरान संकलित पत्रावली के आधार पर यह सिद्ध हुआ कि द्वारिका धरिकार ने नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। इस कारण उसे पाक्सो एक्ट और दुष्कर्म संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया।
अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील दिनेश प्रसाद अग्रहरि, सत्यप्रकाश त्रिपाठी और नीरज कुमार सिंह ने मामले की बहस की और पीड़िता के पक्ष में सजा की मांग की। अदालत ने सभी पक्षों के तर्कों और सबूतों का विस्तार से अध्ययन करने के बाद यह निर्णय सुनाया।
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अदालत ने कहा कि यह सजा न केवल दोषी के लिए न्याय सुनिश्चित करती है, बल्कि ऐसे मामलों में अन्य अपराधियों के लिए भी चेतावनी का काम करेगी। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पाक्सो एक्ट के तहत नाबालिगों के साथ होने वाले अपराधों के प्रति पूरी सख्ती बरती जाएगी और दोषियों को कानून के अनुसार दंडित किया जाएगा।