एक तरफ 90 साल के दादा, दूसरी तरफ 51 लीटर गंगाजल, मुजफ्फरनगर पहुंची इस अनोखी कांवड़ को देख लोग हैरान

सावन की पावन कांवड़ यात्रा के दौरान मुजफ्फरनगर की सड़कों पर एक ऐसा अद्भुत और भावुक कर देने वाला नजारा देखने को मिला, जिसने कलयुग में भी श्रवण कुमार के संस्कारों की याद ताजा कर दी। शिवभक्ति, अगाध श्रद्धा और बुजुर्गों के प्रति अटूट सेवा भावना की यह अनोखी मिसाल हर किसी के दिल को छू रही है। आइए जानते हैं क्या है पूरी कहानी

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 30 July 2026, 5:59 PM IST
google-preferred

Muzaffarnagar: सावन माह की पावन कांवड़ यात्रा में हर साल आस्था के अनोखे रंग देखने को मिलते हैं, लेकिन इस बार मुजफ्फरनगर में एक ऐसी कांवड़ लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी, जिसने हर किसी को श्रवण कुमार की याद दिला दी। गाजियाबाद के चार शिवभक्त पौते अपने 90 वर्षीय दादा को कंधों पर बैठाकर हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर पैदल यात्रा कर रहे हैं। उनकी इस अनूठी सेवा भावना और शिवभक्ति को देखकर लोग भावुक भी हो रहे हैं और उनकी सराहना भी कर रहे हैं।

अनोखे अंदाज में पदयात्रा

विशेष रूप से तैयार की गई इस झूला कांवड़ के एक ओर 51 लीटर पवित्र गंगाजल रखा गया है, जबकि दूसरी ओर उनके दादा विराजमान हैं। दोनों का कुल वजन करीब 150 किलोग्राम बताया जा रहा है। चारों पौते बारी-बारी से इस भारी कांवड़ को अपने कंधों पर उठाकर लगातार पदयात्रा कर रहे हैं। गुरुवार को जब यह अनोखी कांवड़ मुजफ्फरनगर पहुंची तो इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुट गए। कई श्रद्धालुओं ने उनके साथ फोटो और वीडियो भी बनाए।

ये भी पढ़ें - श्रावण मास में कांवड़ यात्रा और शिवालयों के लिए अलर्ट, सरयू घाटों से लेकर मंदिरों तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम

दादा को कंधों पर बैठाकर ले जाने का लिया था संकल्प

शिवभक्त मनजीत ने बताया कि उन्होंने भगवान भोलेनाथ से संकल्प लिया था कि वह अपने दादा को कंधों पर बैठाकर हरिद्वार ले जाएंगे, वहां उन्हें गंगा स्नान कराएंगे और फिर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए पवित्र गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करेंगे। उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि अपने बुजुर्गों के प्रति सम्मान, सेवा और परिवार के संस्कारों को जीवंत रखने का प्रयास भी है।

भोलेनाथ बाबा के जयकारों के साथ शुरू की यात्रा

उन्होंने बताया कि इतनी भारी कांवड़ लेकर यात्रा करना आसान नहीं है। इसलिए चारों भाई बारी-बारी से कांवड़ उठाते हैं और जरूरत पड़ने पर थोड़ी देर विश्राम करने के बाद फिर यात्रा शुरू कर देते हैं। रास्ते भर लोग उनका उत्साह बढ़ाते हैं और बाबा भोलेनाथ के जयकारों के साथ उनका स्वागत करते हैं।

बड़े-बुजुर्गों की सेवा सबसे बड़ा धर्म

मनजीत का कहना है कि आज के दौर में जहां लोग अपने बुजुर्गों के लिए समय निकालने में भी कठिनाई महसूस करते हैं, वहीं उनका उद्देश्य समाज को यह संदेश देना है कि माता-पिता और दादा-दादी की सेवा सबसे बड़ा धर्म है। यदि हर व्यक्ति अपने परिवार के बुजुर्गों का सम्मान करे, तो समाज में संस्कार और अपनापन दोनों मजबूत होंगे।

ये भी पढ़ें - कांवड़ यात्रा के लिए कानपुर में बड़ा ट्रैफिक प्लान लागू, इस दिन तक बदले रहेंगे रूट, ड्रोन कैमरों से होगी निगरानी

इस अनोखी कांवड़ से मिली प्रेरणादायी संदेश

मुजफ्फरनगर पहुंची इस अनोखी कांवड़ ने श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया। लोगों ने इसे आधुनिक युग में श्रवण कुमार की सेवा भावना का जीवंत उदाहरण बताया। कांवड़ यात्रा के बीच यह दृश्य न केवल शिवभक्ति का प्रतीक बना, बल्कि परिवार, संस्कार और बुजुर्गों के सम्मान का प्रेरणादायी संदेश भी देता नजर आया।

Location :  Muzaffarnagar

Published :  30 July 2026, 5:59 PM IST

Related News

Advertisement