मंत्री की चेतावनी भी बेअसर! आखिर किसके इशारे पर प्रदर्शनकारियों पर दर्ज हुआ मुकदमा?

मुज़फ्फरनगर में बिजली कटौती के विरोध में हुए प्रदर्शन के बाद कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने मुख्य अभियंता को फोन कर प्रदर्शनकारियों पर मुकदमा दर्ज न करने की चेतावनी दी। इसके बावजूद बिजली विभाग ने तीन नामजद और कई अज्ञात लोगों पर केस दर्ज करा दिया, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल खड़े हो गए।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 29 June 2026, 2:22 PM IST
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Muzaffarnagar: जिले में बिजली संकट को लेकर हुए प्रदर्शन के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार की सख्त चेतावनी के बावजूद बिजली विभाग ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यशैली और सरकार के भीतर समन्वय पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

शनिवार को गांधी कॉलोनी बिजलीघर पर लगातार बिजली कटौती से परेशान लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के बाद जूनियर इंजीनियर रमनजीत सिंह ने नई मंडी कोतवाली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ तहरीर देने की तैयारी की। इसकी जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार के आवास पहुंचे और उनसे हस्तक्षेप की मांग की।

फोन पर मुख्य अभियंता को लगाई फटकार

मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री अनिल कुमार ने मुख्य अभियंता विनोद गुप्ता को फोन कर स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर मुकदमा लिखवाया तो अच्छा नहीं होगा।" साथ ही ट्रांसफॉर्मर बदलने में 20 से 30 घंटे की देरी पर भी नाराज़गी जताई और बिजली व्यवस्था में तत्काल सुधार के निर्देश दिए। मंत्री ने इस संबंध में जिलाधिकारी से भी बातचीत की।

शाम होते-होते दर्ज हो गया मुकदमा

हालांकि मंत्री की चेतावनी का असर विभाग पर दिखाई नहीं दिया। रविवार को अपराह्न 4:12 बजे नई मंडी कोतवाली में जेई रमनजीत सिंह की तहरीर पर तीन नामजद और 15 से 20 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 191(2), 127(2) और 121(1) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

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अब उठ रहे हैं कई सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वयं मुकदमा दर्ज न करने के निर्देश दे रहे थे, तब बिजली विभाग ने उनकी बात को क्यों नहीं माना? क्या विभाग ने प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत स्वतंत्र निर्णय लिया या फिर मंत्री के निर्देशों की अनदेखी की गई? इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। लोग इसे सरकार और विभाग के बीच समन्वय की कमी तथा "मंत्री बनाम विभाग" की खामोश जंग के रूप में देख रहे हैं।

Location :  Muzaffarnagar

Published :  29 June 2026, 2:22 PM IST

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