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वंदे मातरम् के 150 साल पूरे (Img: X)
New Delhi: 15 अगस्त 2026 को देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस बार आजादी के जश्न के साथ एक और ऐतिहासिक अवसर भी जुड़ा है, ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष। यह गीत केवल कुछ शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से गहराई से जुड़ी ऐसी रचना है, जिसने लंबे समय तक लोगों के भीतर देश के लिए कुछ करने की भावना जगाई।
केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर देशभर में सालभर चलने वाला स्मरणोत्सव शुरू किया है। इसकी शुरुआत 7 नवंबर 2025 को हुई और कार्यक्रम 7 नवंबर 2026 तक चलने हैं। इस दौरान सामूहिक गायन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और युवाओं की भागीदारी से जुड़े कई आयोजन किए जा रहे हैं।
‘वंदे मातरम्’ के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय थे। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार उन्होंने इसे 7 नवंबर 1875 को लिखा था। बाद में यह रचना उनके चर्चित उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल हुई, जो 1882 में प्रकाशित हुआ। धीरे-धीरे यह रचना साहित्य के पन्नों से निकलकर स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज बन गई। 1896 के कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ ठाकुर ने ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया, जिसके बाद यह राष्ट्रीय आंदोलन से और मजबूती से जुड़ता चला गया।
आजादी के बाद ‘वंदे मातरम्’ को भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में सम्मान मिला, जबकि ‘जन गण मन’ राष्ट्रीय गान है। संविधान सभा में 24 जनवरी 1950 को यह स्पष्ट किया गया कि स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाने वाले ‘वंदे मातरम्’ को ‘जन गण मन’ के समान सम्मान दिया जाएगा।
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‘वंदे मातरम्’ की आधिकारिक रचना में छह छंद हैं। लंबे समय से सार्वजनिक और आधिकारिक इस्तेमाल में शुरुआती दो छंद अधिक सुनने को मिलते रहे हैं। जनवरी 2026 में गृह मंत्रालय के नए दिशा-निर्देशों के बाद आधिकारिक अवसरों पर पूरे छह छंदों वाले संस्करण को लेकर प्रोटोकॉल तय किया गया है। इसकी अवधि करीब 3 मिनट 10 सेकंड है। आकाशवाणी ने भी 26 मार्च 2026 से छह-छंद वाले संस्करण का प्रसारण शुरू किया।
गीत की शुरुआत “वन्दे मातरम्” से होती है। इसके शुरुआती छंद में मातृभूमि को सुजलाम, सुफलाम और शीतल हवाओं वाली धरती के रूप में नमन किया गया है। आगे इसकी प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली और मातृभूमि के प्रति श्रद्धा का भाव सामने आता है।
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यही वजह है कि 150 साल बाद भी ‘वंदे मातरम्’ केवल इतिहास की किताबों में बंद नहीं है। सरकारी आयोजनों से लेकर देशभर के सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक इसकी गूंज सुनाई दे रही है। 2026 में मनाया जा रहा यह 150वीं वर्षगांठ समारोह नई पीढ़ी को भी उस गीत की कहानी से जोड़ने की कोशिश है, जिसने कभी आजादी की लड़ाई में लोगों के दिलों में नई ऊर्जा भरी थी।
Location : New Delhi
Published : 14 August 2026, 7:57 PM IST