मिर्जापुर का मनिगढ़ा घोटाला: दो-दो तारीखें, दर्जनों RTI और सिर्फ बहाने; क्या अधिकारियों की मिलीभगत से फाइलों में दफन हो गई जांच?

मिर्जापुर के हलिया ब्लॉक के मनिगढ़ा गांव में विकास कार्यों की जांच और दर्जनों आरटीआई बेअसर साबित हो रही हैं। डीएम के आदेश के बावजूद अभिलेख नहीं मिलने से जांच अधूरी है, जिससे पारदर्शी शासन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

Updated : 15 August 2026, 12:19 PM IST
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Mirzapur: उत्तर प्रदेश सरकार भले ही भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और पारदर्शी शासन का दावा करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। मिर्जापुर जिले के विकास खंड हलिया के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मनिगढ़ा में विकास कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यहां प्रशासनिक आदेश और जांच समितियां भी भ्रष्टाचार के पहरेदारों के सामने बेबस नजर आ रही हैं।

तय तारीखों पर भी नहीं हुई जांच, कौन छिपा रहा है अभिलेख?

मनिगढ़ा गांव में हुए विकास कार्यों की उच्च स्तरीय जांच के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर एक जांच टीम का गठन किया गया था। प्रशासनिक स्तर पर जांच और भौतिक सत्यापन के लिए दो बार- 29 जनवरी 2026 और 25 मार्च 2026 की तारीखें तय की गईं। हैरानी की बात यह है कि महीनों बीत जाने के बाद भी जांच आज तक पूरी नहीं हो सकी है।

जांच अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि हलिया विकास खंड के बीडीओ, संबंधित ग्राम सचिव और ग्राम प्रधान द्वारा आवश्यक अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी व्यवस्था में बैठे जिम्मेदार लोग जिलाधिकारी के आदेशों से भी ज्यादा ताकतवर हैं?

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दर्जनों आरटीआई आवेदन, फिर भी चुप्पी

इस पूरे मामले का एक और बेहद गंभीर पहलू सूचना के अधिकार (RTI) से जुड़ा है। शिकायतकर्ता पक्ष का दावा है कि ग्राम पंचायत, बीडीओ, डीपीआरओ और सीडीओ कार्यालय में अब्दुल समद के नाम से दर्जनों आरटीआई आवेदन भेजे गए हैं।

इन सभी आवेदनों के पोस्टल ऑर्डर और डाक रसीदें सुरक्षित होने के बावजूद ग्राम पंचायत स्तर से आज तक किसी भी सूचना का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया है। जब आम नागरिक को आरटीआई कानून के तहत जानकारी ही नहीं मिलेगी, तो वह भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज कैसे बुलंद करेगा?

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डीएम कार्यालय तक गुहार, अब भी कार्रवाई का इंतजार

मामले की गंभीरता को देखते हुए 24 जून 2026 को मिर्जापुर के जिलाधिकारी को स्पीड पोस्ट (संख्या-ईयू239333177आईएन) के माध्यम से विस्तृत शिकायत भेजी गई, जो 27 जून 2026 को प्राप्त भी हो चुकी है।

अब इस प्रकरण को मुख्य विकास अधिकारी (CDO) और जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) को भी भेजा जा रहा है। शिकायतकर्ता की मांग है कि तत्काल प्रभाव से अभिलेखों को सुरक्षित कर जांच अधिकारी को सौंपा जाए, मौके पर निष्पक्ष भौतिक सत्यापन हो और लापरवाही बरतने वालों की जवाबदेही तय की जाए।

Location :  Mirzapur

Published :  15 August 2026, 12:19 PM IST

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