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पुलिस की गिरफ्त में 6 अपराधी (सोर्स- एक्स)
Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अपराधियों ने पुलिस महकमे को शर्मसार करने वाली एक बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। खुद को पुलिस अधिकारी बताकर कुछ शातिर बदमाशों ने एंटीक सामानों के एक बड़े कारोबारी का अपहरण कर लिया। बदमाशों ने दिनदहाड़े इस दुस्साहस को अंजाम दिया और पीड़ित को स्कॉर्पियो गाड़ी में बंधक बनाकर लगभग नौ घंटे तक आगरा और कन्नौज के रास्तों पर घुमाते रहे। इस दौरान कारोबारी के साथ मारपीट की गई और असलहे के बल पर डराया-धमकाया गया। आखिरकार, बदमाशों ने परिजनों से 13 लाख रुपए और जेवरों की फिरौती वसूलने के बाद उसे लखनऊ के शहीद पथ पर छोड़ा।
पुलिस की शुरुआती जांच में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। इस सनसनीखेज अपहरण की पूरी साजिश बिहार की राजधानी पटना में बैठकर रची गई थी, जिसमें पीड़ित कारोबारी का ही एक करीबी बिजनेस पार्टनर शामिल था। उसी पार्टनर ने पिछले बीस दिनों के भीतर कारोबारी की करीब सात बार रेकी करवाई थी।
घटना वाले दिन यानी 12 सितंबर को जब सुदर्शन घोष अपनी आलमबाग स्थित दुकान जा रहे थे, तभी बदमाशों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए उन्हें रोका। आरोपियों के पास इंस्पेक्टर, दरोगा और सिपाहियों के फर्जी आईडी कार्ड थे, जिन्हें दिखाकर उन्होंने रौब जमाया और पूछताछ के बहाने उन्हें जबरन अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी में बैठा लिया।
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गाड़ी में बैठते ही बदमाशों ने असली रंग दिखाना शुरू कर दिया। उन्होंने असलहा दिखाकर कारोबारी को डराया और विरोध करने पर बुरी तरह पीटा। इसके बाद बदमाशों ने उन्हें लखनऊ से निकालकर आगरा और कन्नौज के रास्तों पर घुमाना शुरू कर दिया। लगातार जान से मारने की धमकी मिलने के बाद डरे-सहमे कारोबारी ने अपनी पत्नी को फोन किया और फिरौती की रकम तयशुदा लोकेशन पर पहुंचाने को कहा।
परिस्थितियों की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित की पत्नी ने अपने ड्राइवर के जरिए 13 लाख रुपए नकद और कुछ कीमती जेवर कन्नौज में बदमाशों तक पहुंचाए। फिरौती की यह रकम मिलने के बाद बदमाशों ने कारोबारी को लखनऊ के शहीद पथ पर लाकर छोड़ दिया और फरार हो गए। घर लौटने के बाद पीड़ित ने अपने परिवार को आपबीती सुनाई और अगले दिन कृष्णनगर थाने पहुंचकर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ साउथ के डीसीपी मोहम्मद मुश्ताक ने खुलासे के लिए कुल आठ विशेष पुलिस टीमों और सर्विलांस सेल का गठन किया। पुलिस टीमों ने तकनीकी साक्ष्यों, स्थानीय सूचना तंत्र और लगभग 220 से 240 सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया, जिसके बाद आरोपियों की पहचान संभव हो सकी।
घटना के आठ दिन बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए बदमाशों में बुलंदशहर के शिकारपुर निवासी अनुराग, लवी कुमार, दीपांशु कुमार और आकाश चौधरी के अलावा बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी अनुराग कुमार और सारण के सोनपुर निवासी मनीष कुमार शामिल हैं।
पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार बदमाशों ने कई अहम राज उगले हैं। उन्होंने बताया कि यह अंतरराज्यीय गिरोह मुख्य रूप से अमीर लोगों को निशाना बनाकर लूटपाट करता था। वे रईस लोगों की आर्थिक स्थिति की जानकारी जुटाकर उनकी रेकी करते थे। पूछताछ में यह भी सामने आया कि बदमाशों के पास सिर्फ एक स्कॉर्पियो नहीं बल्कि कई गाड़ियां थीं, जिन पर वे पुलिस की नजरों से बचने के लिए फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल करते थे।
गिरोह के पास से पुलिस के चार फर्जी आईडी कार्ड भी बरामद किए गए हैं। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी अलग-अलग राज्यों में भाग गए थे और लूटे गए पैसों व जेवरों को आपस में बांट लिया था। हैरानी की बात यह है कि ये शातिर बदमाश एक बार फिर किसी नई वारदात को अंजाम देने के इरादे से लखनऊ लौटे थे, तभी सतर्क पुलिस ने उन्हें धर दबोचा। फिलहाल पुलिस अन्य फरार आरोपियों की तलाश के साथ-साथ लूटी गई नकदी और जेवरों की शत-प्रतिशत बरामदगी के लिए आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी हुई है।
Location : Lucknow
Published : 21 September 2026, 8:30 AM IST