फिरोजाबाद में स्वास्थ्य विभाग की ‘रात की कैद’, आयुष्मान आईडी के नाम पर कर्मचारियों को बनाया बंधक

आयुष्मान भारत योजना के लक्ष्य को पूरा करने के लिए फिरोजाबाद में स्वास्थ्य विभाग पर संविदा कर्मचारियों को रातभर ऑफिस में बंद कर जबरन काम कराने का गंभीर आरोप लगा है, जिससे विभागीय कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 30 January 2026, 5:30 AM IST
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Firozabad: फिरोजाबाद जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली ने इंसानियत और कानून—दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सरकारी लक्ष्य पूरा करने की हड़बड़ी में विभागीय अफसरों पर आरोप है कि उन्होंने अपने ही संविदा कर्मचारियों को ऑफिस के भीतर बंद कर देर रात तक जबरन काम कराया। हालात ऐसे बने कि कर्मचारी रोते रहे, गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन दफ्तर का ताला नहीं खुला।

क्या है पूरा मामला

मामला मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, दबरई का है, जहां आशा और एएनएम की आयुष्मान आईडी बनाने का लक्ष्य पूरा करने के लिए करीब 40 से 45 संविदा कर्मचारियों को गुरुवार देर रात तक रोके रखा गया। आरोप है कि ऑफिस का गेट बाहर से बंद कर दिया गया और किसी को भी घर जाने नहीं दिया गया।

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कौन-कौन रहे बंधक

इस कथित बंधक बनाने की घटना में डाटा ऑपरेटर, बीपीएम और बीसीपीएम शामिल थे। इन सभी पर आशा और एएनएम की आयुष्मान आईडी जनरेट करने का दबाव बनाया गया। कर्मचारियों का कहना है कि वे काम करना चाहते थे, लेकिन तकनीकी बाधाएं सामने आ रही थीं, जिन्हें अधिकारी समझने को तैयार नहीं थे।

ओटीपी बना सबसे बड़ी बाधा

नाम न छापने की शर्त पर एक डाटा ऑपरेटर ने बताया कि आयुष्मान आईडी बनाने के लिए ओटीपी आशा और एएनएम के मोबाइल पर जाना जरूरी था। रात के 11-12 बजे के बाद कोई भी आशा कार्यकर्ता फोन नहीं उठा रही थी। बिना ओटीपी के आईडी बनाना नामुमकिन था, लेकिन अधिकारियों ने इसे मानने से इनकार कर दिया और कर्मचारियों को कमरों में बंद कर दिया गया।

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रोते रहे कर्मचारी, नहीं खुला गेट

भारी मानसिक दबाव, थकान और घर न जाने देने की मजबूरी में कई कर्मचारी भावुक हो गए। कर्मचारियों ने अधिकारियों से हाथ जोड़कर निवेदन किया कि उन्हें छोड़ दिया जाए और अगली सुबह काम पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन गेट पर लटका ताला उनकी बेबसी की गवाही देता रहा।

सीएमओ का बयान

वहीं इस मामले पर सीएमओ रामबदन राम ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसी कर्मचारी को बंधक नहीं बनाया गया। आयुष्मान आईडी बनाने का कार्य देर रात तक चला और अधिकारी भी मौके पर मौजूद थे। उन्होंने कहा कि इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।

उठ रहे सवाल

हालांकि सवाल अब भी कायम हैं कि अगर सब स्वैच्छिक था तो गेट पर ताला क्यों लगाया गया। क्या लक्ष्य पूरा करने के नाम पर कर्मचारियों की आजादी और गरिमा से समझौता किया जा सकता है?

Location : 
  • Firozabad

Published : 
  • 30 January 2026, 5:30 AM IST

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