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देश की सुरक्षा में तैनात एक और जवान कर्तव्य पथ पर शहीद हो गया। कबाड़ माफियाओं के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए सीआईएसएफ (CISF) के प्रधान आरक्षक सतीश चंद भारती ने इलाज के दौरान वाराणसी के अस्पताल में दम तोड़ दिया।
बांसगांव में शहीद को अंतिम विदाई
Gorakhpur: देश की सुरक्षा में तैनात एक और जवान कर्तव्य पथ पर शहीद हो गया। कबाड़ माफियाओं के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए सीआईएसएफ (CISF) के प्रधान आरक्षक सतीश चंद भारती ने इलाज के दौरान वाराणसी के अस्पताल में दम तोड़ दिया। उनकी शहादत की खबर जैसे ही गांव और जिले में पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
जानकारी के अनुसार मूल रूप से गोरखपुर जनपद के बांसगांव थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सभा टेढ़वा गुवार निवासी सतीश चंद भारती मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले के नवानगर थाना क्षेत्र में तैनात थे। बताया जा रहा है कि उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली स्थित एक बंद पड़ी कोयला खदान की सुरक्षा में सीआईएसएफ जवानों की ड्यूटी लगी थी। इसी दौरान 18-19 जनवरी की मध्य रात्रि करीब 2 बजे कबाड़ माफियाओं ने चोरी की नीयत से जवानों पर हमला कर दिया।
पुलिस के अनुसार, रूटीन चेकिंग के दौरान जब निरीक्षक विकास कुमार व्यू-पॉइंट पोस्ट पर पहुंचे तो सतीश चंद भारती वहां नहीं मिले। तलाश के दौरान वह पास के एक नाले में गंभीर हालत में पाए गए। हमलावर वारदात को अंजाम देकर कीमती केबल तार लेकर फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया।
घायल जवान को पहले सिंगरौली जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर देखते हुए उन्हें तत्काल वाराणसी के एपेक्स अस्पताल रेफर किया गया। कई दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद शुक्रवार को इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। शहादत की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
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शनिवार को शहीद जवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव लाया गया। इसके बाद गोला उपनगर स्थित मुक्तिधाम पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सीआईएसएफ तथा स्थानीय पुलिस बल के जवानों ने शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। वातावरण “अमर रहें” के नारों से गूंज उठा और हर आंख नम दिखी।
इस मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी, विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा क्षेत्र के सैकड़ों गणमान्य लोग मौजूद रहे। वहीं, पुलिस ने हमलावर कबाड़ माफियाओं की गिरफ्तारी के लिए दबिश तेज कर दी है और जल्द खुलासे का दावा किया जा रहा है।
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शहीद सतीश चंद भारती की शहादत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक देश के जवान माफियाओं की दरिंदगी का शिकार होते रहेंगें।