क्या आपको पता है? NCR में किस जिले के रहने वाले हैं यूपी के DGP राजीव कृष्ण, वेस्ट यूपी के कई कुख्यात बदमाशों का किया था एनकाउंटर

उत्तर प्रदेश को चार साल बाद स्थाई डीजीपी मिल गया है। 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण को प्रदेश की पुलिस की कमान सौंपी गई है। गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) से जुड़े राजीव कृष्ण अपने सख्त प्रशासन, अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और तकनीक आधारित पुलिसिंग के लिए जाने जाते हैं। नोएडा, मेरठ और आगरा में उनके कार्यकाल की कई पहलें आज भी चर्चा में हैं।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 1 June 2026, 3:13 PM IST
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Noida Desk: उत्तर प्रदेश पुलिस को चार वर्षों के लंबे इंतजार के बाद स्थाई पुलिस महानिदेशक मिल गया है। वर्ष 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण को प्रदेश का नया स्थाई डीजीपी नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति के साथ ही नोएडा में खुशी की लहर दौड़ गई है। नोएडा के लोग इसे अपने शहर के लिए गर्व का क्षण मान रहे हैं, क्योंकि राजीव कृष्ण का इस शहर से न केवल प्रशासनिक बल्कि व्यक्तिगत जुड़ाव भी रहा है। वह नोएडा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं और उनका स्थाई निवास भी यहीं है।

नोएडा में बनाई थी सख्त कानून व्यवस्था की पहचान

राजीव कृष्ण का कार्यकाल नोएडा पुलिस के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दौर माना जाता है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रहते हुए उन्होंने कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई प्रभावी कदम उठाए थे। शहर में अपराध नियंत्रण के लिए बीट पुलिसिंग की शुरुआत की गई, जिससे पुलिस और आम जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ। इसके साथ ही यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए चस्पा चालान व्यवस्था लागू की गई, जिसने ट्रैफिक नियमों के पालन को नई दिशा दी।

उनके कार्यकाल में कई कुख्यात अपराधी पुलिस मुठभेड़ों में ढेर हुए और अपराधियों के बीच पुलिस का खौफ बढ़ा। इसी दौरान उनके उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें गैलंट्री मेडल से सम्मानित किया था। उस समय नोएडा के लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया था।

मेरठ जोन में भी दिखाई अपनी क्षमता

नोएडा के बाद राजीव कृष्ण मेरठ जोन के आईजी पद पर भी तैनात रहे। इस दौरान उन्होंने कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई प्रयोगात्मक फैसले लिए। उनकी रणनीतियों का असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में देखने को मिला। पुलिसिंग में तकनीक के इस्तेमाल और जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाने के उनके प्रयास सफल रहे।

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टेक्नोलॉजी आधारित पुलिसिंग के पक्षधर

राजीव कृष्ण की पहचान हमेशा तकनीक का उपयोग कर अपराध नियंत्रण करने वाले अधिकारी के रूप में रही है। नवंबर 2025 में उन्होंने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लिए स्पीड लिमिट इंटीग्रेशन सिस्टम का उद्घाटन किया था। इस व्यवस्था के तहत गूगल मैप पर वाहन चालकों को उनकी गाड़ी की वास्तविक गति के साथ सड़क की निर्धारित स्पीड लिमिट भी दिखाई देने लगी। इस पहल का उद्देश्य सड़क हादसों को कम करना और लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग के लिए प्रेरित करना था।

आगरा में बनाया था ‘ऑपरेशन पहचान’ ऐप

फरवरी 2021 में आगरा जोन के एडीजी रहते हुए राजीव कृष्ण ने तकनीक के माध्यम से पुलिसिंग को नई दिशा दी। उन्होंने अपने कार्यालय में तैनात सिपाही मोहित कुमार की मदद से ‘ऑपरेशन पहचान’ ऐप विकसित कराया। इस ऐप के जरिए अपराधियों का सत्यापन, मिशन शक्ति अभियान की निगरानी, महिला सुरक्षा कार्यक्रमों की ट्रैकिंग और एंटी रोमियो स्क्वायड की गतिविधियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया गया। महिला पुलिसकर्मियों की लोकेशन ट्रैकिंग से लेकर गुमशुदा और बरामद लोगों के रिकॉर्ड तक सभी जानकारियां इसी ऐप के माध्यम से दर्ज की जाने लगी। इससे पुलिसिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ीं।

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साइबर अपराध के खिलाफ शुरू किया विशेष अभियान

राजीव कृष्ण ने साइबर अपराध को भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती मानते हुए पुलिस बल को पहले से तैयार करने पर जोर दिया। आगरा जोन में उन्होंने पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध की जांच और शिकायतों के निस्तारण का विशेष प्रशिक्षण दिलाया। विशेषज्ञों के माध्यम से ऑनलाइन कार्यशालाएं आयोजित कराई गईं। साथ ही आम जनता को भी साइबर ठगी और ऑनलाइन अपराधों से बचने के लिए जागरूक किया गया।

उम्मीदों के साथ शुरू हुआ नया कार्यकाल

सख्त प्रशासन, तकनीक आधारित पुलिसिंग और नवाचारों के लिए पहचाने जाने वाले राजीव कृष्ण के डीजीपी बनने से प्रदेशभर में पुलिस व्यवस्था को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं। वहीं नोएडा के लोग इसे अपने शहर के लिए सम्मान की बात मान रहे हैं। लोगों का मानना है कि जिस अधिकारी ने नोएडा में पुलिसिंग के नए मानक स्थापित किए, वह अब पूरे उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

Location :  Noida

Published :  1 June 2026, 3:11 PM IST

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