हिंदी
बदायूं जिले के दातागंज कस्बे में स्थित सिटी हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक महिला की दर्दनाक मौत का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि यह निजी अस्पताल अवैध तरीके से वर्षों से संचालित हो रहा था और इलाज में भारी लापरवाही के चलते महिला की जान चली गई।
इलाज के नाम पर बड़ी लापरवाही
Badaun: बदायूं जिले के दातागंज कस्बे में स्थित सिटी हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक महिला की दर्दनाक मौत का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि यह निजी अस्पताल अवैध तरीके से वर्षों से संचालित हो रहा था और इलाज में भारी लापरवाही के चलते महिला की जान चली गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और परिजनों में भारी आक्रोश देखने को मिला।
मृतका के परिजनों ने बताया कि महिला की तबीयत बिगड़ने पर उसे इलाज के लिए दातागंज स्थित सिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में मौजूद एक महिला डॉक्टर ने मरीज को भर्ती करने से पहले परिजनों से मोटी रकम जमा करवाई और इलाज की पूरी गारंटी भी ली थी। भरोसे में आकर परिजनों ने महिला को अस्पताल में भर्ती करवा दिया।
परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान महिला की हालत लगातार बिगड़ती गई। जब स्थिति गंभीर हो गई तो परिजनों ने उसे किसी बड़े और बेहतर अस्पताल में ले जाने की बात कही। इस दौरान परिजन लगातार अस्पताल स्टाफ से गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने उनकी एक न सुनी। आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने मुख्य गेट में ताला डाल दिया, जिससे महिला को बाहर नहीं ले जाया जा सका।
परिजनों का कहना है कि गेट बंद होने के कारण महिला को समय पर सही इलाज नहीं मिल सका और वह अस्पताल के अंदर ही तड़पती रही। काफी देर तक मदद न मिलने के कारण महिला ने दम तोड़ दिया। महिला की मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया और उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिटी हॉस्पिटल लंबे समय से अवैध तरीके से संचालित हो रहा है। अस्पताल के पास न तो जरूरी रजिस्ट्रेशन है और न ही इलाज की वैध अनुमति। इसके बावजूद जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं।
Rudraprayag: उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर रुद्रप्रयाग में बड़ी लड़ाई का ऐलान
महिला की मौत के बाद परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर समय रहते अस्पताल को बंद किया गया होता तो आज एक जान बच सकती थी। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि अवैध अस्पताल के संचालन की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं की गई।