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नई दिल्ली: बीते कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। ट्रंप सरकार के नए टैरिफ ऐलान और उसके जवाब में चीन द्वारा उठाए गए कदमों ने ग्लोबल ट्रेड में खलबली मचा दी है।
डाइनामाइट न्यूज संवादाता के अनुसार, इसका सीधा असर कच्चे तेल पर पड़ा है। जिसकी कीमतें पिछले दो वर्षों में पहली बार इतनी तेजी से गिरी हैं।
ट्रेड वॉर ने गिराया कच्चे तेल का भाव
ट्रंप के टैरिफ बढ़ाने के फैसले के बाद चीन ने 10 अप्रैल से सभी अमेरिकी वस्तुओं पर 34% अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा कर दी। इस व्यापार युद्ध के असर से कच्चा तेल 13.5% तक गिर चुका है। चीन, जो दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है, उसके टैरिफ के जवाब ने निवेशकों के बीच मंदी की आशंका और गहरी कर दी है।
तेल की कीमतें तीन साल के सबसे निचले स्तर पर
ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 6.5% की गिरावट के साथ 65.58 डॉलर प्रति बैरल तक आ गईं, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 7.4% टूटकर 61.99 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। यह चार सालों में सबसे निचला स्तर है। केवल एक हफ्ते में ही ब्रेंट में 10.9% की गिरावट देखी गई है। जो डेढ़ साल में सबसे बड़ा साप्ताहिक नुकसान है।
एक लीटर कच्चा तेल सिर्फ 35 रुपये!
बिजनेस टीम ने जब इस गिरावट का कैलकुलेशन किया तो चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया। 65.58 डॉलर प्रति बैरल की कीमत का मतलब है कि एक लीटर ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 35 रुपये बैठती है। यानी अब एक लीटर कच्चा तेल भारत में बिकने वाली कोक या पेप्सी की बोतल से भी सस्ता हो चुका है।
तो पेट्रोल 100 के पार क्यों?
भारत में आज भी दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये, मुंबई में 103.50 रुपये, कोलकाता में 105.01 रुपये और चेन्नई में 100.80 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। डीजल भी 90 रुपये के करीब है। जानकार मानते हैं कि इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद पेट्रोल-डीजल के दाम में बदलाव नहीं होना सरकार की नीति और टैक्स स्ट्रक्चर पर सवाल खड़े करता है।
क्या 50 डॉलर पर आ सकता है तेल?
एनर्जी विशेषज्ञ स्कॉट शेल्टन का मानना है कि डब्ल्यूटीआई क्रूड 50 डॉलर तक भी जा सकता है। उनका मानना है कि मौजूदा बाजार की परिस्थिति मांग में बड़ी गिरावट का संकेत देती है। वहीं, गोल्डमैन सैक्स ने अपने प्राइस टारगेट को घटाकर ब्रेंट के लिए 66 डॉलर और डब्ल्यूटीआई के लिए 62 डॉलर कर दिया है।
ओपेक+ की रणनीति और भारत पर असर
तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक+ ने मई में उत्पादन 4.11 लाख बैरल प्रति दिन तक बढ़ाने का फैसला लिया है, जिससे कीमतों पर और दबाव आएगा। ऐसे में भारत जैसे आयात-निर्भर देश को फायदा मिल सकता है, लेकिन विंडफॉल टैक्स जैसी नीतियों की वजह से कंपनियां रेट कटौती से बचती हैं।
क्या पेट्रोल सस्ता होगा?
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के अनुज गुप्ता का कहना है कि जिस स्तर तक क्रूड गिरा है, उसके अनुसार भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 20 से 25 रुपये तक कटौती होनी चाहिए। लेकिन यदि सरकार विंडफॉल टैक्स को फिर से लागू करती है, तो कंपनियों के लिए यह संभव नहीं होगा।
एक साल से नहीं बदली कीमतें
मार्च 2024 में आखिरी बार पेट्रोल-डीजल में 2 रुपये की कटौती की गई थी। उसके बाद से अब तक कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि इंटरनेशनल मार्केट में तेल की कीमतें 35 रुपये प्रति लीटर तक आ गई हैं।
Published : 5 April 2025, 11:42 AM IST
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