सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: TMC का नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर चुनाव आयोग को मिला अल्टीमेटम

सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी की याचिका पर टीएमसी नाम और चुनाव चिह्न विवाद को लेकर चुनाव आयोग को तीन महीने में फैसला सुनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने दोनों विरोधी गुटों को चार हफ्ते में अपनी दलीलें पूरी करने को कहा है, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

Updated : 28 September 2026, 3:32 PM IST
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New Delhi: राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज करने वाले ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न के अधिकार की लड़ाई अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने इस बहुचर्चित विवाद को सुलझाने के लिए चुनाव आयोग को सख्त डेडलाइन तय कर दी है। कोर्ट के इस दखल के बाद यह साफ हो गया है कि जल्द ही पार्टी के नाम और उसके पारंपरिक 'फूल और घास' वाले निशान पर असमंजस की स्थिति खत्म होगी।

ममता बनर्जी की याचिका पर सर्वोच्च अदालत का कड़ा निर्देश

यह पूरा घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दायर की गई एक महत्वपूर्ण याचिका के बाद सामने आया है। दरअसल, चुनाव आयोग ने अपने एक अंतरिम फैसले के तहत टीएमसी के मूल नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी, जिससे दोनों विरोधी गुटों के लिए अपनी राजनीतिक पहचान बनाए रखना मुश्किल हो गया था।

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चुनाव आयोग के इसी फैसले को चुनौती देते हुए ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले की सुनवाई देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष बेंच कर रही है। बेंच ने मामले की गंभीरता को समझते हुए दोनों ही विरोधी गुटों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे चुनाव आयोग के समक्ष चल रही कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही में बिना किसी देरी के, अगले चार हफ्तों के भीतर अपनी सभी दलीलें और दस्तावेज पूरी तरह से जमा कर दें।

चुनाव आयोग के पाले में गेंद: तय समयसीमा में होगा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने केवल पक्षों को ही समयसीमा में नहीं बांधा है, बल्कि चुनाव आयोग को भी एक स्पष्ट समय-चक्र के भीतर अपना फैसला सुनाने का आदेश दिया है। अदालत के निर्देशानुसार, जैसे ही दोनों गुटों की ओर से चार सप्ताह के भीतर दलीलें पूरी हो जाएंगी, उसके ठीक तीन महीने के भीतर चुनाव आयोग को इस मामले पर अंतिम और ठोस फैसला लेना होगा।

इससे पहले, चुनाव आयोग ने 'चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश 1968' के सुसंगत प्रावधानों का हवाला देते हुए यह अंतरिम आदेश दिया था कि जब तक विवाद का पूरी तरह से निपटारा नहीं हो जाता, तब तक कोई भी गुट तृणमूल कांग्रेस के नाम और अधिकृत चुनाव चिह्न का उपयोग नहीं करेगा। इसके साथ ही आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग वैकल्पिक नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए थे, ताकि राजनीतिक गतिविधियां बाधित न हों।

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क्या थम पाएगा राजनीतिक घमासान?

यह पूरा विवाद टीएमसी के भीतर नेतृत्व और वर्चस्व की लड़ाई से उपजा है, जहां ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुट पार्टी की विरासत पर अपना दावा ठोक रहे हैं। चुनाव आयोग द्वारा दोनों पक्षों की लंबी सुनवाई और तर्कों को परखने के बाद यह महसूस किया गया था कि इस मामले में कोई भी सतही फैसला लेने के बजाय गहराई से कानूनी जांच की जरूरत है।

Location :  New Delhi

Published :  28 September 2026, 3:31 PM IST

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