चीन की नापाक चाल पर भारत की कूटनीतिक स्ट्राइक: नक्शे में दर्ज किए अरुणाचल के 27 रणनीतिक रत्न

चीन की हरकतों का भारत ने दिया करारा जवाब! सर्वे ऑफ इंडिया ने नक्शा अपडेट कर अरुणाचल के 27 स्थानों को आधिकारिक भारतीय नाम दिए। थग ला और जसवंत गढ़ समेत कई ऐतिहासिक दर्रे व स्मारक शामिल। जानिए चीन पर भारत की इस कूटनीतिक स्ट्राइक का पूरा सच।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 9 August 2026, 4:28 PM IST
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Itanagar: चीन सालों से भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश को ‘दक्षिण तिब्बत’ या ‘जंगनान’ बताकर उसके इलाकों के चीनी नाम जारी करता रहा है। 2017, 2021 और 2023 में चीन की इस नापाक हरकत पर भारत ने इस बार सिर्फ कड़ा विरोध दर्ज नहीं कराया, बल्कि एक बड़ा कूटनीतिक और प्रशासनिक दांव खेल दिया है।

सर्वे ऑफ इंडिया ने देश का नया आधिकारिक नक्शा अपडेट करते हुए चीन सीमा से लगे 27 अति-संवेदनशील और रणनीतिक स्थानों को उनके विशुद्ध भारतीय नामों के साथ दर्ज कर दिया है। यह कदम दुनिया और चीन को स्पष्ट संदेश है कि अरुणाचल भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और रहेगा।

नक्शे पर चमके 1962 के युद्ध के 'रणनीतिक रत्न'

इस नए नक्शे में केवल नदियाँ या पहाड़ियाँ ही दर्ज नहीं की गई हैं, बल्कि 1962 के युद्ध में भारत के पराक्रम की गवाही देने वाले ऐतिहासिक स्थलों को भी शामिल किया गया है। इनमें थग ला, द्जो ला, रिजा ला और पुकुर ला जैसे दुर्गम पहाड़ी दर्रे शामिल हैं।

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इसके अलावा 1962 के महानायक जसवंत सिंह रावत की याद में बना 'जसवंत गढ़' और हवलदार शेर-ए-थापा की शहादत का प्रतीक 'शेर-ए-थापा मेमोरियल' भी अब नक्शे का आधिकारिक हिस्सा हैं। 1959 के पहले सीमा टकराव का केंद्र रहे 'लॉन्गजू' को भी इसमें जगह दी गई है।

27 स्थानों की सूची में कौन-कौन से इलाके शामिल?

अधिकारियों के मुताबिक, चार दर्रों और सांबो सरोवर के अलावा 21 अन्य बस्तियों व महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भारतीय नामों से दर्ज किया गया है। इनमें माजा, बीसा, बड़ा कुंदुन, छोटा कुंदुन, धन बारी, प्रीतनगर, बुद्धमंदिर, जयरामपुर, तेरीतनगर, रामनगर, सागर, पद्मा, ज्योतिनगर, बैसाखी, छोटा रोपुक, बड़ा रोपुक, शिवाजी नगर, सुनपुरा और कामलंग नगर शामिल हैं। इनमें से कई इलाके पहले केवल सैन्य नक्शों (Military Maps) तक सीमित थे, लेकिन अब इन्हें भारत के प्रशासनिक नक्शे में शामिल कर दिया गया है।

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शी जिनपिंग के दौरे और ब्रिक्स सम्मेलन से पहले सख्त संदेश

भारत का यह कदम कूटनीतिक रूप से बेहद टाइमिंग-फ्रेंडली माना जा रहा है। सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा की संभावना जताई जा रही है।

2020 के गलवान विवाद के बाद यदि जिनपिंग भारत आते हैं, तो उससे ठीक पहले भारत ने वार्ता की टेबल पर अपना रुख साफ कर दिया है। 6 अगस्त को नई दिल्ली में हुई WMCC की 36वीं बैठक में भले ही सीमा पर शांति बनाए रखने पर जोर दिया गया हो, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि अपनी संप्रभुता और जमीन के दावों पर कोई ढील नहीं दी जाएगी।

Location :  Itanagar

Published :  9 August 2026, 4:28 PM IST

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