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General MM Naravane (Image: Pinterest)
New Delhi: पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव बताया है। उन्होंने साफ कहा कि आतंकवाद को समर्थन देने वालों के लिए अब कोई सुरक्षित जगह नहीं है। जनरल नरवणे के मुताबिक, पहलगाम आतंकी हमले के बाद की गई यह कार्रवाई सिर्फ सीमा पार मौजूद आतंकी ठिकानों तक सीमित नहीं थी, बल्कि पाकिस्तान के अंदर उन ठिकानों और लोगों तक पहुंची, जिन पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप थे।
जनरल नरवणे ने कहा कि उरी और पुलवामा आतंकी हमलों के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई की थी, लेकिन उस समय सैन्य कार्रवाई का दायरा मुख्य रूप से सीमा के आसपास मौजूद आतंकी ढांचों तक सीमित रहा था। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने अलग रणनीति अपनाई। इस बार कार्रवाई का लक्ष्य उन ठिकानों तक पहुंचना था, जहां से आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन मिलने की बात सामने आई थी।
पूर्व सेना प्रमुख ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के अंदर मुरीदके और बहावलपुर जैसे स्थानों को निशाना बनाया गया। उनके मुताबिक, इन जगहों को आतंकवादी नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण केंद्रों के तौर पर देखा जाता रहा है। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई के जरिए भारत ने साफ संदेश दिया कि आतंकवाद को संरक्षण देने वालों को किसी भी स्थान पर सुरक्षित नहीं माना जा सकता।
जनरल नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें आतंकवादियों के खिलाफ उनके इलाके में जाकर कार्रवाई करने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत के सैन्य तौर-तरीकों में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दिखाता है। अब आतंकवाद को समर्थन देने वाले तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की क्षमता और इच्छाशक्ति दोनों दिखाई गई है।
पाकिस्तान की ओर से सिर क्रीक क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों और कथित ऑपरेशन अबाबील को लेकर पूछे गए सवाल पर जनरल नरवणे ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां समय-समय पर होती रहती हैं। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त होने के कारण उनके पास इस कथित अभियान की पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन भारतीय सशस्त्र बल हर गतिविधि पर नजर रखते हैं और जरूरत पड़ने पर उचित समय पर कार्रवाई करने में सक्षम हैं। जब उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान भारत से मुकाबला करने की स्थिति में है, तो उन्होंने सीधा जवाब देते हुए कहा, "मेरी राय में, नहीं।"
भारत और चीन के रिश्तों पर बात करते हुए जनरल नरवणे ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई बातचीत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता का यह 25वां दौर था। उन्होंने कहा कि भारत-चीन सीमा का वास्तविक निर्धारण अभी तक पूरी तरह नक्शे और जमीन दोनों स्तरों पर स्पष्ट नहीं हुआ है, जिसके कारण समय-समय पर तनाव की स्थिति बनती रहती है।
भारतीय सेना में थिएटर कमांड के गठन पर जनरल नरवणे ने कहा कि इसकी चर्चा कारगिल युद्ध के बाद से चल रही है। उन्होंने कहा कि थिएटराइजेशन कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि यह बदलते युद्ध के स्वरूप के हिसाब से विकसित होने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में फैसले लेने का समय लगातार कम हो रहा है। ऐसे में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और तेजी से निर्णय लेने के लिए थिएटर कमांड की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है।
Location : New Delhi
Published : 29 August 2026, 5:15 PM IST