सिंदूर के बाद बंद हुआ अटारी-वाघा बॉर्डर, फिर भी नहीं टूटी रिश्तों की डोर; ऐसे भारत आईं 150 पाकिस्तानी दुल्हनें

भारत-पाकिस्तान तनाव और अटारी-वाघा बॉर्डर बंद होने के बाद दोनों देशों के बीच शादी के रिश्तों पर भी असर पड़ा। इसके बावजूद करीब 150 पाकिस्तानी दुल्हनें अलग-अलग देशों के रास्ते भारत पहुंचीं और अपने भारतीय जीवनसाथियों से शादी की। किसी ने मस्कट तो किसी ने दुबई, कोलंबो और ढाका के रास्ते भारत का सफर तय किया।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 23 August 2026, 1:07 PM IST
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Nagpur: भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में तनाव बढ़ा तो सिर्फ सरहदें ही नहीं बदलीं, बल्कि उन परिवारों की मुश्किलें भी बढ़ गईं जिनकी रिश्तेदारी और शादी के रिश्ते दोनों देशों में जुड़े हुए थे। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर के बीच भारत-पाकिस्तान के बीच आवाजाही पर सख्ती बढ़ी और अटारी-वाघा बॉर्डर बंद हो गया। इसका असर उन युवाओं पर भी पड़ा, जिन्होंने सीमा के आर-पार शादी के सपने देखे थे। लेकिन रिश्तों की यह डोर पूरी तरह नहीं टूटी। करीब डेढ़ साल के लंबे इंतजार, वीजा की पाबंदियों और लंबी हवाई यात्राओं के बाद करीब 150 पाकिस्तानी दुल्हनें अलग-अलग देशों के रास्ते भारत पहुंचीं और यहां अपने भारतीय जीवन साथियों के साथ शादी की।

बॉर्डर बंद हुआ तो दुल्हनों ने बदला रास्ता

सामान्य परिस्थितियों में भारत का वैध वीजा रखने वाले पाकिस्तानी नागरिक अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते भारत आ सकते थे। लेकिन बॉर्डर बंद होने के बाद यह रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। ऐसे में शादी के लिए भारत आने वाली पाकिस्तानी दुल्हनों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल से जून के बीच करीब 150 पाकिस्तानी दुल्हनें लगभग 450 रिश्तेदारों के साथ भारत पहुंचीं। उन्हें पाकिस्तान से सीधे भारत आने के बजाय मस्कट, कोलंबो, ढाका, दुबई और कतर जैसे रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ा। इसके बाद वे नागपुर, जोधपुर, अहमदाबाद, रायपुर, पुणे और भोपाल जैसे शहरों तक पहुंचीं।

गृह मंत्रालय की विशेष छूट से आसान हुई राह

रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्रालय ने सिंध के एक प्रतिष्ठित धार्मिक स्थल के साथ मिलकर ऐसी यात्राओं के लिए विशेष छूट दी। हालांकि पाकिस्तान से आने वाले रिश्तेदारों के लिए भारत में रुकने की अवधि सीमित थी। उन्हें निर्धारित समय के भीतर वापस लौटना था। इसी वजह से कई परिवारों ने शादी की रस्मों को बेहद सादगी से पूरा किया। बड़े समारोह, लंबी मेहमाननवाजी और कई दिनों तक चलने वाली शादी के बजाय सीमित लोगों की मौजूदगी में विवाह संपन्न कराया गया।

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एक साल से ज्यादा इंतजार के बाद हुई आरती की शादी

नागपुर में लंबे समय से रह रहे इंकेश जशनानी की सगाई पाकिस्तान के सिंध की आरती से हुई थी। दोनों ने पिछले साल शादी की योजना बनाई थी, लेकिन भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के कारण सबकुछ बदल गया। बताया गया कि आरती मई 2025 में पाकिस्तान से भारत आने की कोशिश में वाघा बॉर्डर के करीब पहुंची थीं। लेकिन इसी दौरान भारत ने अटारी गेट बंद कर दिया। शादी की उम्मीद एक बार फिर अधर में लटक गई। एक साल से ज्यादा समय गुजरने के बाद आरती मस्कट के रास्ते नागपुर पहुंचीं और आखिरकार दोनों की शादी हो सकी।

तीन साल बाद काजल से मिला संजय

नागपुर में रहने वाले संजय कलानी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। संजय की सगाई करीब तीन साल पहले सिंध के घोटकी जिले की काजल से हुई थी। शादी पहले ही तय थी, लेकिन भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और यात्रा प्रतिबंधों के कारण दोनों परिवारों की मुश्किलें बढ़ती गईं। एक समय ऐसा आया जब दोनों ने शादी की उम्मीद लगभग छोड़ दी थी। लेकिन आखिरकार काजल कराची से मस्कट होते हुए दिल्ली पहुंचीं और वहां से नागपुर आईं। करीब पांच महीने पहले दोनों शादी के बंधन में बंध गए। संजय के भाई धीरज की मंगेतर संजना भी सिंध के मीरपुर इलाके से इसी तरह भारत पहुंचीं।

पाकिस्तान से भारत शादी करने आया दूल्हा भी

इस पूरी कहानी में सिर्फ दुल्हनों ने ही पाकिस्तान से भारत का सफर नहीं किया। सिंध के घोटकी से राभेल जसवाणी अपने माता-पिता के साथ नागपुर पहुंचे थे। उन्हें भारत में श्रेया से शादी करनी थी। शादी के बाद राभेल ने भारत में रहने की इच्छा जताई। उनका कहना है कि वह भारत में बसना चाहते हैं और अगर दोनों देशों के बीच बॉर्डर खुलते हैं तो अपने माता-पिता को भी भारत लाना चाहेंगे।

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शदानी दरबार ने उठाया फंसी दुल्हनों का मुद्दा

रिपोर्ट के मुताबिक, सिंध के घोटकी शहर में स्थित शदानी दरबार ने पाकिस्तान में फंसी दुल्हनों और उनके भारत में तय रिश्तों का मुद्दा उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दरबार की ओर से इन परिवारों की समस्याओं को सामने लाया गया और यात्राओं को लेकर मदद की गई। शदानी दरबार के पीठाधीश संत युधिष्ठिरलाल शदानी अब रायपुर में रहते हैं। बताया गया कि उनकी संस्था ने उन परिवारों की आवाज उठाई, जिनकी बेटियां या बहुएं भारत-पाकिस्तान सीमा बंद होने के कारण शादी के बाद अपने जीवनसाथी तक नहीं पहुंच पा रही थीं।

बॉर्डर बंद, लेकिन रिश्तों का रास्ता खुला रहा

भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव ने दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही मुश्किल जरूर कर दी, लेकिन शादी के रिश्तों को पूरी तरह रोक नहीं पाया। जिन परिवारों के लिए अटारी-वाघा का रास्ता बंद हो गया था, उन्होंने मस्कट, दुबई, कोलंबो, ढाका और कतर जैसे रास्तों का सहारा लिया। करीब 150 पाकिस्तानी दुल्हनों का भारत पहुंचना इसी कहानी का हिस्सा है। हालांकि इन यात्राओं में लंबा समय, ज्यादा खर्च, सीमित वीजा और परिवार के सदस्यों की गैरमौजूदगी जैसी कई मुश्किलें सामने आईं।

Location :  Nagpur

Published :  23 August 2026, 1:05 PM IST

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