हिंदी
नेपाल में बाढ से सीमा पर बढ़ा खतरा
नई दिल्ली: नेपाल और तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब भारत-चीन सीमा से जुड़े इलाकों में भी संभावित जल आपदा को लेकर चिंता बढ़ गई है। चीन की लोकतंत्र समर्थक संस्था चाइना डेमोक्रेसी पार्टी के अध्यक्ष वानजुन शिए ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया है कि चीन-भारत सीमा के पास स्थित एक जलाशय का पानी चेतावनी स्तर को पार कर चुका है और बांध टूटने की स्थिति में पानी भारत की ओर आ सकता है।
हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वानजुन शिए ने न तो जलाशय का नाम बताया है और न ही उसकी सटीक लोकेशन, जलस्तर या बांध की तकनीकी स्थिति से जुड़ी कोई जानकारी साझा की है। ऐसे में फिलहाल इसे एक अपुष्ट दावा ही माना जा रहा है।
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने के बाद भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान, मलबा और पानी भोटेकोशी नदी में पहुंच गया था। अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई।
इस आपदा में सड़कें, पुल, घर और सीमा क्षेत्र का बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ। नेपाल और चीन दोनों ने इसे ग्लेशियर टूटने से जुड़ी प्राकृतिक आपदा बताया है।
नेपाल सरकार के अनुसार, इस आपदा में अब तक बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है और हजारों लोग लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल की घटना ने यह जरूर दिखाया है कि हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर टूटने, भूस्खलन या अचानक जल प्रवाह बढ़ने से कुछ ही घंटों में बड़े स्तर पर तबाही हो सकती है।
हालांकि, किसी जलाशय के भारत के लिए खतरा बनने का आकलन केवल उसके सीमा के पास होने से नहीं किया जा सकता। इसके लिए कई अहम जानकारियां जरूरी हैं, जैसे:
इन जानकारियों के बिना यह कहना मुश्किल है कि बांध टूटने पर पानी सीधे भारत तक पहुंचेगा या नहीं।
नेपाल-चीन सीमा के पास बाढ़ और मलबे के कारण नदी का रास्ता बाधित हो गया था, जिससे एक प्राकृतिक अवरोध झील यानी बैरियर झील बन गई थी।
इस झील में लगातार पानी जमा होने के कारण इसके टूटने का खतरा पैदा हो गया था। चीन ने आशंका जताई थी कि आने वाले दिनों में करीब 30 लाख घन मीटर पानी इस झील में पहुंच सकता है, जिससे निचले इलाकों में दोबारा बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
चीनी अधिकारियों के अनुसार, सीमा क्षेत्र में बनी झील का क्षेत्रफल अब कम हुआ है और पानी धीरे-धीरे बाहर निकल रहा है।
हालांकि, ग्लेशियर टूटने वाली जगह के नीचे एक अन्य बड़ा जलाशय मौजूद होने की जानकारी भी सामने आई है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक ये जलाशय पूरी तरह खाली नहीं हो जाते, तब तक दोबारा बाढ़ का खतरा बना रह सकता है।
हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए भारत के लिए नदी जलस्तर की निगरानी, सैटेलाइट सर्विलांस और समय पर चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है।
नेपाल की आपदा ने यह साफ कर दिया है कि हिमालय क्षेत्र में किसी भी जल स्रोत या ग्लेशियर में अचानक बदलाव का असर कई देशों तक पहुंच सकता है।
Location : New Delhi
Published : 29 August 2026, 4:40 PM IST
Topics : China Dam Water Level Himalayan Flood Risk India China Border Flood Threat Nepal flood disaster Tibet Glacier Burst