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प्रतीकात्मक छवि (Source: AI Generated)
New Delhi: भारतीय होटल कारोबारी और कंजर्वेशन-लेड लक्जरी ब्रांड 'सुजान' (SUJAN) के सह-संस्थापक जैसल सिंह ने एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय डील के तहत जाम्बिया में दो प्रसिद्ध सफारी कैंपों का अधिग्रहण कर लिया है। इस कदम के साथ ही सुजान ने पहली बार भारत से बाहर किसी विदेशी धरती पर अपना कारोबार फैलाया है।
जैसल सिंह की कंपनी 'सुजान' ने जाम्बिया के विश्व प्रसिद्ध 'चियावा कैंप' (Chiawa Camp) और 'ओल्ड मोंडोरो' (Old Mondoro) सफारी कैंपों को खरीद लिया है। इस डील की घोषणा सोमवार, 28 सितंबर को 'चियावा सफारीज' से की गई। हालांकि, दोनों में से किसी भी पक्ष ने इस अधिग्रहण की वित्तीय कीमत का खुलासा नहीं किया है। यह दोनों कैंप दक्षिणी अफ्रीका के 'लोअर जाम्बेजी नेशनल पार्क' में जाम्बेजी नदी के किनारे स्थित हैं, जो अफ्रीका के सबसे कम विकसित और प्राकृतिक रूप से समृद्ध संरक्षित इलाकों में गिने जाते हैं। इनमें 'चियावा' अधिक पुराना और लोकप्रिय है, जबकि 'ओल्ड मोंडोरो' पार्क के भीतर एकांत में स्थित है जहां सीमित संख्या में टेंट हैं।
जैसल सिंह इस डील को केवल बिजनेस का विस्तार नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि अफ्रीका हमेशा से उनके दिल के करीब रहा है, क्योंकि वहां का वन्यजीव और प्राकृतिक सौंदर्य अद्भुत है। इसके अलावा, अफ्रीका ने यह भी साबित किया है कि जिम्मेदार पर्यटन (रिस्पॉसिबल टूरिज्म) वन्यजीव संरक्षण में किस प्रकार अहम भूमिका निभा सकता है।
खास बात यह है कि जाम्बिया में यह प्रॉपर्टी सुजान की पहली अफ्रीकी प्रॉपर्टी नहीं है, क्योंकि कंपनी पहले से ही केन्या के मसाई मारा में 'एलिफेंट पेपर कैंप' का संचालन कर रही है। हालांकि, किसी अफ्रीकी संपत्ति का यह पहला आधिकारिक अधिग्रहण है।
जैसल सिंह का पारिवारिक और व्यावसायिक बैकग्राउंड बेहद मजबूत है। वह भारत की जानी-मानी ऑटोमोटिव पार्ट्स निर्माता कंपनी 'ANAND ग्रुप' के सुपरवाइजरी बोर्ड के डायरेक्टर और एग्जीक्यूटिव बोर्ड के वाइस चेयरमैन हैं। उनकी पत्नी और सुजान की को-फाउंडर अंजलि सिंह इसी ग्रुप की एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन हैं। 2020 में कोटक वेल्थ हुरुन की रिपोर्ट में उनकी नेट वर्थ 34.5 अरब रुपये आंकी गई थी।
जैसल सिंह ने साल 2000 में राजस्थान के रणथंभौर में भारत के शुरुआती लक्जरी सफारी कैंपों में से एक 'शेर बाग' की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने 'अमन-ए-खास', जैसलमेर में 'द सराई' और 2013 में जोधपुर-उदयपुर के बीच तेंदुओं के क्षेत्र में प्रसिद्ध 'जवाई' कैंप की स्थापना की। भारत में सुजान की सभी प्रॉपर्टीज प्रतिष्ठित 'रिले एंड शैटो' (Relais & Chateaux) का हिस्सा हैं। इसके अलावा, सिंह वन्यजीव और पोलो पर किताबें लिखने के साथ-साथ इंडियन पोलो एसोसिएशन की रूल्स कमिटी के चेयरमैन भी हैं।
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यह पूरी डील दो ऐसे परिवारों के बीच हुई है, जिन्होंने अपने बिजनेस की शुरुआत खुद की थी। 'चियावा सफारीज' भी दशकों से लोअर जाम्बेजी क्षेत्र में कैंप चला रहा है। 'सुजान' इस ऐतिहासिक अधिग्रहण को दो पारिवारिक रूप से शुरू किए गए संगठनों के एक बेहतरीन मिलन के रूप में देख रहा है, जो आने वाले समय में वन्यजीव संरक्षण और लक्जरी टूरिज्म को एक नई दिशा देगा।
Location : New Delhi
Published : 29 September 2026, 1:51 PM IST
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