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दिव्या मित्तल समेत यूपी के कई अफसरों ने बदली सियासी राह (Img- AI)
Lucknow: उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने अगले कदम से पर्दा उठाते हुए राजनीति में उतरने का औपचारिक ऐलान कर दिया है। 29 सितंबर की सुबह जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने साफ किया कि वह उत्तर प्रदेश छोड़कर कहीं नहीं जाएंगी और जनता के मुद्दों के लिए निडर होकर आवाज उठाती रहेंगी।
दिव्या मित्तल का यह फैसला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने किसी स्थापित राजनीतिक दल का दामन थामने के बजाय जनता के साथ मिलकर एक नया स्वतंत्र मंच खड़ा करने की बात कही है। बिना किसी कैडर, पार्टी फंड या राजनीतिक संरक्षण के अकेले मैदान में उतरने का उनका यह प्रयोग यूपी की पारंपरिक जातिगत राजनीति में कितना कारगर साबित होगा, यह तो आने वाला वक्त बताएगा।
पर क्या आप जानते हैं, दिव्या मित्तल पहली ऐसी पूर्व नौकरशाह नहीं हैं जिन्होंने सिविल सेवा का मोह छोड़कर राजनीति का रुख किया है। उत्तर प्रदेश में ऐसे कई आईएएस और आईपीएस अधिकारी रहे हैं, जिन्होंने खाकी और खादी के बीच का यह सफर तय किया और उनका अनुभव बेहद खट्टा-मीठा रहा है।
नौकरशाही से राजनीति में आकर तुरंत सफलता पाने वाले चेहरों में 1994 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी असीम अरुण का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। कानपुर के पहले पुलिस कमिश्नर रह चुके असीम अरुण ने वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली थी।
इसके बाद वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए और कन्नौज विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर विधायक बने। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश सरकार में समाज कल्याण तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
1988 बैच के गुजरात कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी अरविंद कुमार शर्मा (ए.के. शर्मा) का राजनीतिक सफर भी बेहद प्रभावशाली रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गुजरात से लेकर पीएमओ (PMO) तक लगभग 20 वर्षों तक काम करने का अनुभव रखने वाले ए.के. शर्मा ने जनवरी 2021 में एमएसएमई (MSME) सचिव पद से वीआरएस ले लिया था।
राजनीति में कदम रखने के बाद वह भाजपा में शामिल हुए और वर्तमान में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में नगर विकास एवं ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कैबिनेट मंत्री हैं।
मायावती सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) रह चुके 1977 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी बृजलाल भी उन अफसरों में शामिल हैं, जिन्होंने राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। एटीएस और एसटीएफ जैसे महत्वपूर्ण विभागों की कमान संभालने वाले बृजलाल सेवानिवृत्ति के बाद भारतीय जनता पार्टी से जुड़े।
इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें राज्य अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग का अध्यक्ष बनाया और वर्तमान में वह भाजपा की ओर से राज्यसभा सांसद के रूप में उच्च सदन में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
IAS अधिकारियों में राम बहादुर और कुंवर फतेह बहादुर सिंह जैसे दिग्गज नामों ने भी नौकरी के बाद राजनीति में किस्मत आजमाई। मायावती सरकार में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के वीसी रहे राम बहादुर ने सेवानिवृत्ति के बाद बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर मोहनलालगंज से चुनाव लड़ा और बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए।
वहीं, 1981 बैच के आईएएस अधिकारी कुंवर फतेह बहादुर सिंह, जो 2009 से 2017 तक प्रमुख सचिव (गृह) और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव जैसे अत्यंत शक्तिशाली पदों पर रहे, उन्होंने भी सेवानिवृत्ति के बाद बसपा का दामन थामा।
पूर्व अधिकारियों के इन अनुभवों को देखें तो राजनीति की राह हर किसी के लिए एक समान आसान नहीं रही है। अब देखना यह होगा कि किसी दल का सहारा लिए बिना स्वतंत्र रूप से मैदान में उतरीं दिव्या मित्तल का यह नया राजनीतिक सफर क्या नया इतिहास रचता है।
Location : Lucknow
Published : 29 September 2026, 11:19 AM IST