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भारत की पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने, नवाचार को बढ़ावा देने और वैश्विक मान्यता सुनिश्चित करने के लिए TKDL डिजिटल पुस्तकालय एक अभिनव पहल है। डाइनामाइट न्यूज़ की इस खबर में पढ़िए विस्तार से…
प्रो. (डॉ) सरोज व्यास, निदेशिका, फेयरफील्ड तकनीकी एवं प्रबंधन संस्थान, नई दिल्ली
New Delhi: भारतीय ज्ञान और संस्कृति की समृद्ध परंपरा सदियों से मानव सभ्यता के लिए मार्गदर्शक रही है। वेद, उपनिषद, आयुर्वेद, खगोलशास्त्र, गणित और वास्तुशास्त्र जैसे ज्ञान का संग्रह केवल भारतीय समाज तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अध्ययन और अनुसंधान का विषय है। आधुनिक युग में इन पारंपरिक ज्ञान स्रोतों का संरक्षण और सही उपयोग बड़ी चुनौती बन गया है। इस चुनौती के समाधान के लिए भारत सरकार ने पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL) की स्थापना की है, जो भारतीय ज्ञान की रक्षा और वैश्विक स्तर पर उसकी मान्यता सुनिश्चित करने का अभिनव प्रयास है।
भारतीय ज्ञान प्रणाली सिर्फ सूचनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांड की समग्र समझ और जीवन-दर्शन को समेटे हुए है। इसमें तर्क, अनुभव, परंपरा और अंतर्ज्ञान का संतुलन विद्यमान है। यह ज्ञान पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित होता रहा है और जीवन, विज्ञान, कला और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में निरंतर योगदान देता है। वैश्विक स्तर पर यह प्रणाली कृषि, चिकित्सा, पर्यावरण, हस्तशिल्प और सतत विकास में भी प्रेरणा स्रोत बनी हुई है।
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भारतीय ज्ञान जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें जीवन-चक्र, पूजा-पद्धति, ऋतु चक्र, संस्कृति, व्यवहार, धर्म, बहुभाषा और सांस्कृतिक पर्व शामिल हैं। इसकी विशेषता प्राकृतिक संतुलन और सह-अस्तित्व की अवधारणा है।
हालांकि, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और आधुनिक प्रौद्योगिकी के कारण पारंपरिक ज्ञान कई चुनौतियों का सामना कर रहा है-
बायोपाइरेसी: विदेशी संस्थाओं द्वारा बिना अनुमति जैविक संसाधनों का दुरुपयोग।
बिना अनुमति पेटेंट: भारतीय आविष्कारों का अनधिकृत उपयोग।
सांस्कृतिक एवं सामाजिक शोषण: भाषा, पर्व-त्योहार और परंपराओं का कमजोर होना।
ज्ञान धारकों की उपेक्षा: साहित्य और संस्कृति के महान व्यक्तित्वों का वर्तमान में उपेक्षित होना।
इन समस्याओं से न केवल सांस्कृतिक विरासत को खतरा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना पर भी असर पड़ रहा है।
2001 में स्थापित पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी (TKDL) का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण करना, विदेशी पेटेंट दावों को रोकना और ज्ञान का न्यायपूर्ण उपयोग सुनिश्चित करना है। इसके कार्यक्षेत्र में शामिल हैं-
TKDL ने न केवल पारंपरिक ज्ञान के दुरुपयोग को रोका है, बल्कि यह वैश्विक अनुसंधान और नवाचार में भी योगदान दे रहा है।
पारंपरिक ज्ञान डिजिटल लाइब्रेरी भारतीय ज्ञान प्रणाली के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक मान्यता का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यह केवल सांस्कृतिक विरासत की रक्षा नहीं करती, बल्कि नवाचार, सतत विकास और सामाजिक न्याय को भी प्रोत्साहित करती है। आधुनिक ज्ञान प्रणालियों के साथ इसका समन्वय मानव कल्याण, सांस्कृतिक संरक्षण और वैश्विक विकास की दिशा में एक मजबूत कदम है।