बदायूं की बेटी की हरित क्रांति का असर! विश्व पर्यावरण दिवस पर हजारों पौधे बांटे गए, जानिए क्यों चर्चा में है यह मुहिम?

विश्व पर्यावरण दिवस पर बदायूं में हजारों पौधों के वितरण के साथ एक ऐसी मुहिम को नई ताकत मिली, जिसने पर्यावरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। इस अभियान से जुड़ी एक बेटी की कहानी और उसके प्रयास आज हजारों लोगों को प्रेरित कर रहे हैं।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 5 June 2026, 5:08 PM IST
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Budaun: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ग्राम सराय स्थित पंचतत्व पौधशाला से संस्था के संयोजक अंकित पाठक ने हजारों पौधों का निःशुल्क वितरण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोगों ने भाग लेकर पौधे प्राप्त किए और उन्हें रोपित व संरक्षित करने का संकल्प लिया।

केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं

अंकित पाठक ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने की अपील की। उन्होंने बताया कि पंचतत्व संस्था का उद्देश्य केवल पौध वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि पौधों के संरक्षण और उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित रखना भी अभियान का प्रमुख लक्ष्य है।

वाटर वूमन ने की थी पौधशाला की स्थापना

देशभर में ‘वाटर वूमेन’ के नाम से प्रसिद्ध बदायूं की बेटी शिप्रा पाठक ने अपनी जन्मभूमि दातागंज क्षेत्र के ग्राम सराय में पिछले वर्ष निःशुल्क पौध वितरण और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से पंचतत्व पौधशाला की स्थापना कराई थी। पौधशाला का शुभारंभ क्षेत्र के संत-महात्माओं के वैदिक मंत्रोच्चार और आशीर्वाद के साथ हुआ था।

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शिप्रा पाठक के नेतृत्व में देश के विभिन्न राज्यों में संचालित दर्जनों पौधशालाओं के माध्यम से हजारों पौधों का वितरण और संरक्षण किया जा रहा है। पर्यावरण एवं जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के लिए वह अब तक लगभग 13 हजार किलोमीटर की पदयात्रा कर चुकी हैं। उनकी यात्राओं में नर्मदा, गोमती, वरुणा, मंदाकिनी और नाद नदी संरक्षण अभियान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे हैं।

ऐतिहासिक पदयात्रा पूर्ण करने वाली पहली महिला

इसके अलावा शिप्रा पाठक पीलीभीत से गाजीपुर के कैथी तक 1008 किलोमीटर लंबी गोमती पदयात्रा और अयोध्या से रामेश्वरम तक 4100 किलोमीटर की ऐतिहासिक पदयात्रा पूर्ण करने वाली देश की पहली महिला पर्यावरण यात्री मानी जाती हैं। इन यात्राओं के दौरान नदी संरक्षण और वृक्षारोपण को लेकर व्यापक जनजागरण अभियान चलाया गया।

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हाल ही में उन्होंने देश के 25 प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में पर्यावरण विषयक गोष्ठियों के माध्यम से हजारों युवाओं को पर्यावरण संरक्षण के अभियान से जोड़ा। वर्तमान में पंचतत्व संस्था के हजारों स्वयंसेवक विभिन्न राज्यों में पौधारोपण, जल संरक्षण और पौधों के पालन-पोषण का कार्य कर रहे हैं।

Location :  Budaun

Published :  5 June 2026, 5:08 PM IST

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