UP Panchayat Election: प्रधानों के कार्यकाल को लेकर बड़ा कन्फ्यूजन, चुनाव टलने पर क्या है व्यवस्था?

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टलने के बाद सभी के जेहन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अगर किसी कारणवश पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पाते हैं और चुनाव टल जाते हैं, तो क्या ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और जिला पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ जाता है?

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 5 June 2026, 4:51 PM IST
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Lucknow: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टलने के बाद सरकार ने मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ा दिया था। सरकार ने समय पर पंचायत चुनाव न कराकर मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर उनका कार्यकाल अनिश्चितकाल तक बढ़ा दिया है। अब सवाल यह उठता है कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाना  विधि विरुद्ध है या नहीं।

चुनाव टलने पर क्या होता है?

विशेष परिस्थितियों में यदि चुनाव समय पर नहीं हो पाते हैं, तो वर्तमान प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल स्वतः नहीं बढ़ता। कार्यकाल समाप्त होने के बाद पंचायत का प्रशासनिक प्रबंधन सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासक या सक्षम अधिकारी के माध्यम से कराया जा सकता है। ऐसे मामलों में राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार संविधान पंचायतों के नियमित चुनाव पर जोर देता है और निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक बढ़ाने का कोई सामान्य प्रावधान नहीं है। हालांकि, असाधारण परिस्थितियों में प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए अंतरिम प्रबंध किए जा सकते हैं।

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2026 चुनाव को लेकर बढ़ी उत्सुकता

प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज होने लगी हैं। संभावित दावेदार गांव-गांव संपर्क अभियान चला रहे हैं, जबकि मतदाता भी चुनावी समीकरणों पर नजर बनाए हुए हैं। ऐसे में चुनाव की तिथि और उससे जुड़ी प्रशासनिक तैयारियों को लेकर लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है।

फिलहाल पंचायत चुनाव 2026 को लेकर अंतिम निर्णय और कार्यक्रम राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगा। तब तक चुनाव टलने और कार्यकाल बढ़ने जैसी चर्चाएं केवल अटकलों के दायरे में हैं।

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दूसरी तरफ सरकार के इस आदेश के खिलाफ एक याचिका इलाहबाद हाईकोर्ट में दाखिल की गयी, जिसमें अब राज्य सरकार से जबाब मांगा गया है।  फिलहाल कोर्ट के आदेश पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं, कि कोर्ट सरकार के तर्कों को मानता है या नहीं।  उधर विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है।

ऐसे करेंगे प्रशासक काम

प्रशासक की जिम्मेदारी संभालने के बाद अब नए काम वो डीएम की अनुमति से ही करा सकेंगे। ग्राम पंचायतों के निवर्तमान प्रधानों ने प्रशासक के रूप में 27 मई से काम संभाला। ऐसे में अब इस तिथि से वह कोई भी नया काम कराने के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से डीएम को प्रस्ताव भेजेंगे। फिर डीएम की अनुमति से ही वह कोई नया काम करा सकेंगे।

 

Location :  Lucknow

Published :  5 June 2026, 4:26 PM IST

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