नई दिल्ली घोषणापत्र पर बनी सहमति, 45 पेज, 140 मुद्दे और भारी तनाव… फिर भी भारत ने कैसे कर दिखाया ये कूटनीतिक चमत्कार?

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद जारी नई दिल्ली घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की निंदा और एकतरफा टैरिफ पर पश्चिम को कड़ा संदेश दिया गया है। भारत की इस बड़ी कूटनीतिक सफलता में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और संयुक्त राष्ट्र सुधारों पर भी मुहर लगी है।

Updated : 13 September 2026, 8:24 AM IST
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New Delhi: भारत की मेजबानी में हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद 'नई दिल्ली घोषणापत्र' जारी कर दिया गया है। विभिन्न मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच मतभेद होने के बावजूद भारत सभी को एक मंच पर लाने में कामयाब रहा, जिसे देश की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। 45 पन्नों के इस दस्तावेज में कुल 140 बिंदुओं पर सहमति बनी है।

आतंकवाद पर दो टूक: पहलगाम हमले की कड़ी निंदा

आतंकवाद के मुद्दे पर ब्रिक्स देशों ने भारत के रुख का पूरा समर्थन किया है। घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए उस आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई है, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी। इसके साथ ही सीमा पार आतंकवाद, आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों और उनके वित्तपोषण के नेटवर्क को खत्म करने का कड़ा संकल्प लिया गया है।

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पश्चिमी देशों के एकतरफा टैरिफ और व्यापार नीतियों पर प्रहार

व्यापार के मोर्चे पर पश्चिमी देशों को कड़ा संदेश देते हुए एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों की आलोचना की गई है। यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) जैसे जलवायु आधारित उपायों को संरक्षणवादी और विकासशील देशों के लिए नुकसानदेह बताया गया है। घोषणापत्र में विश्व व्यापार संगठन (WTO) में व्यापक सुधार की मांग भी की गई है ताकि गरीब और विकासशील देशों की आवाज मजबूत हो सके।

पश्चिम एशिया और फलस्तीन के हालात पर चिंता

पश्चिम एशिया में जारी तनाव को लेकर गहरी चिंता जताई गई है और सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की गई है। इसके अलावा, फलस्तीन के मुद्दे को पहली बार घोषणापत्र में प्रमुखता से शामिल किया गया है। गाजा में हिंसा का विरोध करते हुए 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फलस्तीन राष्ट्र के गठन का समर्थन किया गया है और संयुक्त राष्ट्र में इसकी पूर्ण सदस्यता की बात कही गई है।

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स्थानीय मुद्राओं में व्यापार पर जोर, नई ब्रिक्स करेंसी पर चुप्पी

शिखर सम्मेलन के दौरान किसी नई 'ब्रिक्स करेंसी' को लेकर कोई बात नहीं हुई है। इसके बजाय सदस्य देशों के बीच आपसी कारोबार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है। साथ ही सीमा पार भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने के प्रयासों को भी स्वीकार किया गया है।

संयुक्त राष्ट्र सुधार और भारत की भूमिका को समर्थन

घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार की मांग को दोहराया गया है। इसमें भारत और ब्राजील की वैश्विक मंच पर बड़ी भूमिका निभाने की आकांक्षा का समर्थन किया गया है। इसके अलावा, नशाखोरी और मानव तस्करी जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी है।

Location :  New Delhi

Published :  13 September 2026, 8:24 AM IST

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