गंगा को मिलेगा नया जीवन! गोरखपुर सहित 13 शहरों में तैयार हुई नदी प्रबंधन योजना, अब 97 शहरों पर नजर

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने गंगा बेसिन के 13 शहरों के लिए शहरी नदी प्रबंधन योजनाएं पूरी कर ली हैं। इस पहल के तहत नदी संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, बाढ़ प्रबंधन और सतत विकास को शहरी योजनाओं से जोड़ा जाएगा। अब इस मॉडल को गंगा किनारे बसे 97 शहरों तक विस्तार देने की तैयारी है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 25 June 2026, 9:12 AM IST
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New Delhi: गंगा सिर्फ एक नदी नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, आजीविका और जीवन का आधार है। लेकिन बढ़ते शहरीकरण, प्रदूषण और बदलते पर्यावरण के बीच गंगा के स्वास्थ्य को बनाए रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसी चुनौती से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने एक बड़ी पहल शुरू की है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने गंगा बेसिन के 13 प्रमुख शहरों के लिए शहरी नदी प्रबंधन योजनाएं सफलतापूर्वक पूरी कर ली हैं। इस योजना का उद्देश्य शहरों के विकास और नदी संरक्षण के बीच संतुलन बनाना है, ताकि शहरी विस्तार के साथ गंगा का प्राकृतिक स्वरूप भी सुरक्षित रह सके।

नदी के साथ शहरों के विकास की नई सोच

इस परियोजना को राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान और विश्व बैंक के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत शहरों की योजनाओं में नदी के स्वास्थ्य, जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और प्रदूषण कम करने जैसे पहलुओं को शामिल किया जा रहा है। अब तक जिन शहरों के लिए योजना तैयार की गई है, उनमें ऋषिकेश, हल्द्वानी, काठगोदाम, रामनगर, गोरखपुर, शाहजहांपुर, बिजनौर, प्रयागराज, बक्सर, छपरा और गया जैसे महत्वपूर्ण शहर शामिल हैं।

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कृत्रिम आर्द्र भूमि और जल निकासी पर रहेगा फोकस

शहरी नदी प्रबंधन योजनाओं में कई नए और आधुनिक उपायों को शामिल किया गया है। इनमें कृत्रिम आर्द्र भूमि यानी आर्टिफिशियल वेटलैंड्स तैयार करना और पुराने जल निकासी सिस्टम को दोबारा मजबूत करना शामिल है। इन उपायों से शहरों में जमा होने वाले गंदे पानी को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा। साथ ही बारिश के समय जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं से भी राहत मिलने की उम्मीद है।

अयोध्या और कानपुर मॉडल से मिली नई दिशा

इस पहल को आगे बढ़ाने में अयोध्या और कानपुर में किए गए पायलट प्रोजेक्ट काफी अहम साबित हुए हैं। इन शहरों में नदी आधारित विकास योजनाओं के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कानपुर में उन्नत झील मूल्यांकन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया, जिससे जल स्रोतों की स्थिति को समझने और उनके संरक्षण की दिशा में काम करने में मदद मिली। इन सफल प्रयोगों के बाद अब इसी मॉडल को गंगा किनारे बसे अन्य शहरों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।

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97 शहरों तक विस्तार देने की तैयारी

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन का लक्ष्य अब इस योजना को गंगा किनारे बसे सभी 97 शहरों तक पहुंचाना है। पहले चरण में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के 27 शहरों के लिए योजनाएं तैयार की जा रही हैं। इनमें से 12 अतिरिक्त शहरों की योजनाओं को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद धीरे-धीरे अन्य शहरों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा।

पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और समाज तीनों पर असर

यह पहल सिर्फ नदी संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तीन बड़े आधार हैं। पहला पर्यावरणीय स्थिरता, दूसरा आर्थिक विकास और तीसरा सामाजिक कल्याण। नदी को साफ और स्वस्थ रखने से जहां पर्यावरण को फायदा होगा, वहीं पर्यटन, स्थानीय रोजगार और शहरों की जीवन गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। नदी आधारित योजनाओं से शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ेंगे और लोगों को बेहतर वातावरण मिल सकेगा।

Location :  New Delhi

Published :  25 June 2026, 9:12 AM IST

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