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गंगा में मिला शिवलिंग (Img: Freepik)
Chandauli: गंगा केवल आस्था की धारा ही नहीं, बल्कि कई बार ऐसे रहस्यों को भी सामने ले आती है जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं। कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों सूजाबाद-डोमरी क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। यहां गंगा तट से 11 दिनों के भीतर दूसरा शिवलिंग मिलने के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है। श्रद्धालु इसे आस्था से जोड़ रहे हैं, जबकि कई लोग इसके पीछे छिपे इतिहास और कारणों को जानने के लिए उत्सुक हैं।
सबसे खास बात यह है कि हाल ही में मिला शिवलिंग पहले मिले शिवलिंग से काफी हद तक मिलता-जुलता है। दोनों पर नाग की आकर्षक आकृतियां बनी हुई हैं, जिसने लोगों की जिज्ञासा को और बढ़ा दिया है।
डोमरी वार्ड संख्या-48 स्थित गंगा तट पर 5 जून को मछुआरों के जाल में एक विशाल शिवलिंग मिला था। बताया गया कि उसका वजन करीब दो क्विंटल था। इस खोज के बाद इलाके में बड़ी संख्या में लोग पहुंचने लगे थे। स्थानीय लोगों ने उस शिवलिंग को गंगा किनारे बने चबूतरे पर स्थापित कर दिया और विधिवत पूजा-अर्चना शुरू कर दी। धीरे-धीरे यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन गया। प्रतिदिन सैकड़ों लोग वहां दर्शन और पूजा के लिए पहुंचने लगे।
इसी बीच 16 जून को उसी क्षेत्र में एक और शिवलिंग मिलने की खबर सामने आई, जिसने लोगों को हैरान कर दिया।
नया मिला शिवलिंग आकार में पहले वाले से छोटा है, लेकिन उसकी बनावट काफी हद तक समान दिखाई दे रही है। इस पर भी नाग की आकृतियां उकेरी गई हैं। हालांकि, पहले मिले शिवलिंग में ऊपर की ओर एक अतिरिक्त नाग की आकृति थी, जबकि नए शिवलिंग में वह नहीं दिखाई देती। इसके बावजूद दोनों के स्वरूप में समानता होने के कारण लोग इन्हें आपस में जुड़ा हुआ मान रहे हैं।
रतनपुर निवासी अचेत कुमार ने बताया कि गंगा स्नान के दौरान उनकी नजर इस शिवलिंग पर पड़ी। उन्होंने कहा कि पहली नजर में ही इसकी आकृति पहले मिले शिवलिंग जैसी लगी।
यही सवाल इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है। स्थानीय लोगों के बीच कई तरह की बातें चल रही हैं। कुछ इसे धार्मिक संकेत मान रहे हैं तो कुछ का कहना है कि ये किसी पुराने मंदिर या घाट से बहकर यहां पहुंचे हो सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि दूसरे शिवलिंग के अरघे पर सफेद सीमेंट जैसे निशान भी दिखाई दे रहे हैं। इससे यह संभावना जताई जा रही है कि यह कभी किसी भवन, मंदिर या निर्माण का हिस्सा रहा होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा के किनारे लगातार होने वाले कटाव, निर्माण कार्य या पुराने ढांचों के टूटने से ऐसी धार्मिक प्रतिमाएं नदी में पहुंच जाती हैं और बाद में किसी स्थान पर निकल आती हैं।
दो शिवलिंगों के लगातार मिलने के बाद डोमरी क्षेत्र इन दिनों लोगों की उत्सुकता का केंद्र बना हुआ है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की विशेष कृपा मान रहे हैं, जबकि इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वाले लोग इसके पीछे की सच्चाई जानने में जुटे हैं।
Location : Chandauli
Published : 18 June 2026, 7:46 PM IST