“गरीब हूं, तो क्या जहर खाऊं?”, सीतापुर में लोगों की थाली पर संकट, सरकारी गेहूं में घुन ने खोली राशन व्यवस्था की पोल

सीतापुर में मुफ्त राशन योजना के तहत मिलने वाले गेहूं की खराब गुणवत्ता को लेकर कार्डधारकों में भारी रोष है। राशन दुकानों में घुन और कीड़े लगा अनाज पहुंचने से सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।

Post Published By: Priyam Kashyap
Updated : 10 August 2026, 7:03 PM IST
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Sitapur: सरकार गरीब परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के मकसद से मुफ्त राशन देती है। हालांकि, सीतापुर में सरकार द्वारा सप्लाई किए जाने वाले गेहूं की क्वालिटी को लेकर आई शिकायतों ने पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ कार्डधारकों का आरोप है कि राशन की दुकानों तक पहुंचने वाले गेहूं में अक्सर घुन और कीड़े लगे होते हैं। उनका कहना है कि आर्थिक तंगी के कारण उन्हें यह राशन लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

कार्डधारकों का आरोप: खराब क्वालिटी का गेहूं मिलता है

अपनी मुश्किल बताते हुए एक कार्डधारक ने कहा कि वह मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालता है। उसके सामने एक दुविधा है: या तो खराब क्वालिटी का गेहूं ले या फिर राशन लेना ही छोड़ दे। वह पूछता है कि अगर वह राशन नहीं लेगा तो उसका परिवार खाना कैसे पकाएगा।

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कार्डधारकों का कहना है कि क्वालिटी की दिक्कतों के अलावा, कई इलाकों में सप्लाई की जाने वाली मात्रा को लेकर भी शिकायतें आई हैं। नतीजतन कीड़े और घुन लगे गेहूं की खबरों ने खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है।

गोदाम से दुकान तक क्वालिटी की जांच कौन करता है?

अगर दुकानों तक खराब क्वालिटी का गेहूं पहुंच रहा है, तो सवाल उठता है कि किस स्टेज पर क्वालिटी की जांच की गई थी? क्या गोदाम से निकलने से पहले अनाज की जांच होती है? अगर जांच होती है, तो खराब क्वालिटी का गेहूं डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर तक कैसे पहुंच जाता है?

इसके अलावा, अनाज को उठाने, ट्रांसपोर्ट करने और राशन की दुकान तक पहुंचाने के दौरान उसकी निगरानी की जिम्मेदारी भी जांच का विषय है। खराब क्वालिटी के अनाज को वापस करने की प्रक्रिया और लाभार्थियों को इसे बांटने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मानदंडों के बारे में भी जवाब चाहिए।

राशन डीलर ने ऐसी शिकायतों की पुष्टि की

नाम न बताने की शर्त पर एक राशन डीलर ने दावा किया कि खराब क्वालिटी या कीड़े लगे गेहूं की खेप को लेकर साल में एक या दो बार शिकायतें आती हैं। डीलर ने यह भी आरोप लगाया कि खराब क्वालिटी के अनाज के बारे में शिकायत करने पर दबाव बनाया जाता है।

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हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए, प्रशासनिक जांच के बाद ही असली स्थिति साफ हो पाएगी।

सिंडिकेट से जुड़े आरोपों की भी होनी चाहिए जांच 

खराब क्वालिटी के गेहूं की सप्लाई के पीछे एक संदिग्ध सिंडिकेट की मिलीभगत और प्रभावशाली लोगों के दबाव के आरोप सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

इस संदर्भ में, जांच सिर्फ राशन दुकान तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए; बल्कि पूरे अनाज सप्लाई चेन की जांच जरूरी है। वेयरहाउस में अनाज रखने और उसकी क्वालिटी की जांच से लेकर उसे उठाने, ट्रांसपोर्ट करने और दुकान तक पहुंचाने तक की पूरी प्रक्रिया की बारीकी से जांच होनी चाहिए।

यह जांच अनाज से जुड़े पिछले मामलों से होनी चाहिए अलग 

सीतापुर में पहले भी सरकारी अनाज की कथित हेराफेरी और कालाबाजारी के मामले सामने आ चुके हैं। इससे पहले, अनाज की कथित कालाबाजारी की CBI जांच ने भी काफी ध्यान खींचा था। हालांकि, खराब क्वालिटी वाले गेहूं के बारे में मौजूदा शिकायतों को सीधे पिछले मामलों से जोड़ना गलत होगा। केवल निष्पक्ष जांच से ही यह साफ हो पाएगा कि दोनों के बीच कोई संबंध है या नहीं।

गरीबों को सुरक्षित और अच्छी क्वालिटी का मिलना चाहिए राशन 

सरकारी राशन योजना का मकसद जरूरतमंद परिवारों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसलिए, अगर लाभार्थी खराब क्वालिटी या कीड़े लगे गेहूं मिलने की शिकायत करते हैं, तो यह मामला सिर्फ अनाज की क्वालिटी तक सीमित नहीं रहता; यह पूरी निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

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प्रशासन को इन शिकायतों की जांच करनी चाहिए ताकि खराब क्वालिटी वाले गेहूं का स्रोत पता चल सके, यह तय हो सके कि क्वालिटी की जांच किस चरण में की गई थी, और वितरण प्रक्रिया के दौरान कहां लापरवाही हुई। अगर जांच के दौरान गड़बड़ी पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

आखिरकार, एक गरीब परिवार सरकारी राशन को एहसान नहीं, बल्कि अपना अधिकार मानता है। इसलिए, यह बहुत जरूरी है कि उनकी थाली तक पहुंचने वाला अनाज साफ, सुरक्षित और खाने लायक हो।

Location :  Sitapur

Published :  10 August 2026, 7:03 PM IST

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