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दिल को छू लेगी कीर्तना की कहानी (Img: AI Generated Image)
Hyderabad: आज जब ज्यादातर लोग बेहतर सुविधाओं और अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई के लिए निजी स्कूलों का रुख कर रहे हैं, तब तेलंगाना के एक छोटे से गांव की कहानी शिक्षा के मायने अलग तरीके से समझा रही है। भद्राद्री कोठागुडेम जिले के नरपननीपल्ली गांव में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय ऐसा है, जहां पूरी स्कूल में सिर्फ एक छात्रा पढ़ती है। उसका नाम कीर्तना है। हैरानी की बात यह है कि एकमात्र छात्रा होने के बावजूद स्कूल रोज समय पर खुलता है, प्रार्थना होती है, टीचर पढ़ाने आती हैं और सरकार हर साल करीब 12 लाख रुपये इस स्कूल के संचालन पर खर्च कर रही है।
यह कहानी सिर्फ एक स्कूल की नहीं, बल्कि उस सोच की भी है जो शिक्षा को किसी भी कीमत पर जिंदा रखना चाहती है।
कुछ साल पहले तक इस सरकारी स्कूल का नजारा बिल्कुल अलग था। यहां 70 से ज्यादा बच्चे पढ़ते थे। सुबह स्कूल खुलते ही बच्चों की चहल-पहल से पूरा परिसर जीवंत हो जाता था। लेकिन समय के साथ गांव के कई परिवारों ने अपने बच्चों का दाखिला निजी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में करा दिया।
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धीरे-धीरे छात्रों की संख्या घटती चली गई। एक-एक कर सभी बच्चे दूसरे स्कूलों में चले गए और आखिर में इस स्कूल में सिर्फ कीर्तना ही बची। आज पूरी कक्षा में वही अकेली बैठकर पढ़ाई करती है।
कीर्तना के पिता पुलैया चाहते तो अपनी बेटी का दाखिला किसी निजी स्कूल में करा सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उनका मानना है कि अगर गांव का सरकारी स्कूल बंद हो गया तो भविष्य में गरीब परिवारों के बच्चों के लिए शिक्षा का एक अहम विकल्प खत्म हो जाएगा। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी बेटी को उसी सरकारी स्कूल में पढ़ाना जारी रखा। उनका कहना है कि सरकारी स्कूल सिर्फ इमारत नहीं, बल्कि गांव के बच्चों के भविष्य की उम्मीद हैं। उनका यह फैसला अब पूरे इलाके में मिसाल बन चुका है।
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स्कूल में सिर्फ एक बच्ची होने के बावजूद शिक्षिका उमा रोज समय पर स्कूल पहुंचती हैं। वे पूरे समर्पण के साथ कीर्तना को पढ़ाती हैं। स्कूल की घंटी बजती है, प्रार्थना होती है और नियमित रूप से पढ़ाई भी होती है। इस स्कूल के संचालन पर सरकार हर साल करीब 12 लाख रुपये खर्च करती है। इस राशि में शिक्षिका का वेतन, मिड-डे मील, स्कूल का रखरखाव और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
कुछ लोगों के लिए यह खर्च बड़ा लग सकता है, लेकिन शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अगर एक भी बच्चा पढ़ाई से जुड़ा हुआ है तो स्कूल चलाना बेकार नहीं माना जा सकता। शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का अधिकार है और उसे किसी भी हालत में रोका नहीं जाना चाहिए।
Location : Hyderabad
Published : 4 August 2026, 8:14 PM IST